राज्य
01-Feb-2026


सूरत को 342 करोड़ की विकास सौगात, ‘ईज ऑफ लिविंग’ बढ़ाने की दिशा में गुजरात सरकार का बड़ा कदम * सूरत देश का सबसे तेज़ी से विकसित हो रहा शहर, ‘विकसित गुजरात से विकसित भारत’ की यात्रा का ग्रोथ इंजन : मुख्यमंत्री * कतारगाम-वराछा में समान विकास का संकल्प, अत्याधुनिक लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम युवाओं का भविष्य गढ़ेंगे : उपमुख्यमंत्री * स्वच्छता, जल प्रबंधन और वेस्ट वॉटर से आय में सूरत देश का मॉडल शहर बना : केन्द्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल सूरत (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि राज्य के लोगों की ‘ईज ऑफ लिविंग’ बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 के पहले ही महीने में पूरे राज्य में 4870 करोड़ रुपए से अधिक के विभिन्न विकास कार्य सरकार ने भेंट दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सूरत महानगर पालिका के 173.78 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और 169 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास कर सूरतवासियों को कुल 342 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की भेंट दी। उन्होंने इस अवसर पर स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार द्वारा जिन कार्यों का शिलान्यास किया जाता है, उन कार्यों का लोकार्पण भी उसी सरकार के कार्यकाल में सुनिश्चित हो; ऐसी समयबद्ध योजना और कार्य संस्कृति विकसित की है। उसी कार्य संस्कृति को हमने गुजरात में साकार किया है। राज्य सरकार की ‘सार्वजनिक आवास पुनर्विकास योजना-2016’ अंतर्गत कतारगाम क्षेत्र के गोटालावाडी टेनामेंट के 1304 आवासों का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर पुनर्विकास पूरा किया गया है। मुख्यमंत्री ने उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की विशेष उपस्थिति में इन आवासों का लोकार्पण किया तथा लाभार्थियों के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ भी आयोजित किया। मुख्यमंत्री ने सूरत के अक्षरवाडी, डभोली और कतारगाम स्थित अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में कहा कि सूरत आज देशभर में विकास, स्वच्छता और शहरीकरण का उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। सूरत की स्वच्छता सूरतवासियों में आए सकारात्मक बदलाव और स्वच्छता प्रेम का परिणाम है। अपनी स्वच्छता, अनुशासन और आधुनिक शहरी योजना के बल पर सूरत आज मुंबई जैसे महानगरों को भी पीछे छोड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने सूरत को राज्य के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बने हुए सूरत के विकास को उदाहरणीय बताते हुए कहा कि सूरत देश का सबसे तेजी से विकसित हो रहा शहर है। औद्योगिक विकास के कारण समूचे भारत से लोग यहां रोजगार के लिए आकर बस रहे हैं, इसी कारण सूरत को ‘मिनी भारत’ की उपाधि मिली है। डायमंड और टेक्सटाइल कैपिटल के रूप में पहचाना जाने वाला सूरत आज स्वच्छता, ग्रीन मोबिलिटी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में भी अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का विजन साकार हो रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण और हमारा संकल्प हम सभी के सहयोग से ही पूरा होगा। उन्होंने कहा कि सूरत जैसे शहर देश की आर्थिक गतिशीलता के केंद्र हैं और ‘विकसित गुजरात से विकसित भारत’ की यात्रा में नेतृत्व प्रदान करते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि सूरत को मिले 342 करोड़ रुपए के विकास कार्य शहरी नागरिकों की ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ाएंगे। गोटालावाडी टेनामेंट के 1304 आवासों के पुनर्विकास से लाभार्थी परिवारों को सुरक्षित, आधुनिक और आरामदायक आवास मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एयर पॉल्यूशन कंट्रोल, ई मोबिलिटी, प्रदूषण मुक्त परिवहन और सार्वजनिक आवास योजनाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य सरकार द्वारा 2005 में शुरू की गई शहरी विकास यात्रा के परिणामस्वरूप आज गुजरात सर्वांगीण विकास का मॉडल स्टेट बना है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि शहर के प्रत्येक क्षेत्र का समान विकास हो; इसके लिए सरकार और स्थानीय तंत्र लगातार प्रयासरत रहते हैं। उन्होंने कहा कि कतारगाम, वराछा और मोटा वराछा क्षेत्रों में जन सुविधाओं का विस्तार हुआ है। राज्य की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक लाइब्रेरी 70 करोड़ रुपए की लागत से कतारगाम में तैयार की जा रही है, जिसका लोकार्पण आगामी तीन महीनों में होगा। यह लाइब्रेरी हजारों युवाओं का उज्ज्वल भविष्य गढ़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि डभोली क्षेत्र में निर्मित नया ऑडिटोरियम कतारगाम, वराछा और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं, कला-प्रेमियों और नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। नानपुरा गांधी स्मृति, सरदार स्मृति-वराछा और संजीव कुमार ऑडिटोरियम-पाल के बाद अब कतारगाम में भी आधुनिक ऑडिटोरियम बनने से सूरत शहर में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरत महानगर पालिका सौर ऊर्जा के उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपए की बचत कर रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक उदाहरणात्मक कदम है। श्री संघवी ने कहा कि सरकार द्वारा निर्मित ऑडिटोरियम, ब्रिज, लाइब्रेरी और स्कूल जैसे परियोजना केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए हैं। इनकी सुरक्षा, देखभाल और स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि गोटालावाडी टेनामेंट के पुनर्विकास से 1304 परिवारों के जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा और शुभकामनाएं दी कि परिवार जब अद्भूत खुशी के साथ अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तो उनके सपने साकार होंगे। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि जिस गति से सूरत का विकास हो रहा है, वह अन्य शहरों के लिए उदाहरण है। एक समय अस्वच्छ रहा सूरत आज देश का नंबर-वन स्वच्छ शहर बन चुका है। अगले 50 वर्षों की जनसंख्या को ध्यान में रखकर पानी की व्यवस्था का समुचित नियोजन किया गया है। देश में 123 से अधिक ब्रिज के साथ सूरत महानगर पालिका नंबर वन बनी है। सरकार और पालिका के अधिकारियों-पदाधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से विकास तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सूरत महानगर पालिका प्रतिवर्ष गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर 400 करोड़ रुपए की आय अर्जित कर रही है, जो भविष्य में बढ़कर 700 करोड़ रुपए हो जाएगी। वेस्ट वॉटर से इतनी बड़ी आय प्राप्त करने वाली सूरत देश की पहली महानगर पालिका है। पाटिल ने आगे कहा कि तापी नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 931 करोड़ रुपए की तापी शुद्धिकरण परियोजना के चलते उकाई से लेकर सूरत तक 85 किमी दूर से आने वाला औद्योगिक गंदा पानी अब तापी नदी में मिलना बंद हो गया है। उल्लेखनीय है कि 70 करोड़ रुपए की लागत से डभोली में नव निर्मित अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम, 12.66 करोड़ रुपए की लागत से जियाव बुडिया लेक गार्डन का लोकार्पण तथा सूरत मनपा द्वारा बनासकांठा जिले के डीसा तहसील के विठोदर गांव में स्थापित 55.56 करोड़ रुपए की लागत से 10 मेगावाट क्षमता का ग्राउंड माउंटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट, लेक गार्डन रीडिंग रूम, अर्बन हेल्थ सेंटर, शेल्टर होम सहित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण तथा ड्रेनेज, हाइड्रोलिक आदि विभागों के कार्यों का शिलान्यास किया गया। महापौर दक्षेश मावाणी ने कहा कि सूरत शहर की सांस्कृतिक विरासत को निरंतर बनाए रखने के उद्देश्य से लोकार्पित आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह ऑडिटोरियम कतरगामवासियों के लिए एक सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। ग्रीन एनर्जी कॉन्सेप्ट के तहत सूरत महानगर पालिका अपनी आवश्यकता की 28.5 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करने वाली महानगर पालिका बन गई है, जिससे प्रति वर्ष 10 करोड़ रुपए की बचत होगी। सूरत महानगर पालिका मूल बिजली बिल में 70 करोड़ रुपए की बचत करने वाली महानगर पालिका बनी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सूरत वर्ष 2030 तक सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने वाली देश की नंबर वन महानगर पालिका बनेगी। साथ ही, गोटालावाडी में 1304 टेनामेंट के साथ किए गए रिडेवलपमेंट कार्य से निवासियों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है। सतीश/01 फरवरी