राष्ट्रीय
02-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के सूर्य मंदिरों की भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्राकृतिक वातावरण हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। ये मंदिर केवल धार्मिक श्रद्धा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, वैज्ञानिक सोच और स्थापत्य कौशल का भी जीवंत उदाहरण हैं। चाहे ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर हो या गुजरात का मोढेरा, उत्तराखंड का कटारमल हो या कश्मीर का मार्तंड, ये सभी स्थल भारतीय सभ्यता की उस गहराई को दर्शाते हैं, जहां धर्म, विज्ञान और कला एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। भारतीय सभ्यता में सूर्य देव को ऊर्जा, जीवन और चेतना का मूल स्रोत माना गया है। वैदिक काल से ही सूर्य उपासना को विशेष महत्व मिला और इसी परंपरा के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में सूर्य मंदिरों का निर्माण हुआ। इन मंदिरों की संरचना केवल पूजा के उद्देश्य से नहीं की गई थी, बल्कि खगोल विज्ञान, ज्योतिष और गणितीय गणनाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। मंदिरों की दिशा, गर्भगृह की स्थिति और नक्काशी यह दर्शाती है कि उस दौर के शिल्पकार और वास्तुविद अत्यंत उन्नत ज्ञान रखते थे। ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की पहचान माना जाता है। इसे सूर्य देव के रथ के रूप में निर्मित किया गया था, जिसमें विशाल पत्थर के पहिए और घोड़े समय चक्र और सूर्य की गति के प्रतीक हैं। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई नक्काशी जीवन, प्रकृति और मानवीय भावनाओं की सजीव झलक पेश करती है। सूर्य की किरणों की दिशा को ध्यान में रखकर किया गया इसका निर्माण उस समय के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को उजागर करता है। वहीं गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर खगोल विज्ञान और वास्तुकला के अद्भुत तालमेल का उदाहरण है। यहां विशेष खगोलीय अवसरों पर सूर्य की रोशनी सीधे गर्भगृह तक पहुंचती है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की गवाही देता है। जम्मू-कश्मीर की वादियों में स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर आज भले ही खंडहर के रूप में मौजूद हो, लेकिन इसकी विशाल संरचना और ऊंचे स्तंभ इसके गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। पहाड़ों से घिरा यह स्थल सूर्य उपासना के साथ प्रकृति और स्थापत्य संतुलन का अनोखा उदाहरण है। उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित कटारमल सूर्य मंदिर शांत वातावरण और आध्यात्मिक अनुभूति के लिए जाना जाता है। यहां से सूर्य उदय और अस्त का दृश्य मन को विशेष शांति प्रदान करता है। ग्वालियर का सूर्य मंदिर अपेक्षाकृत आधुनिक निर्माण होने के बावजूद प्राचीन स्थापत्य शैली से प्रेरित है। इसका डिजाइन कोणार्क की झलक देता है और यह आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक कला का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है। शहर के बीच स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इन सभी सूर्य मंदिरों का सांस्कृतिक महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। ये स्थल बताते हैं कि प्राचीन भारत में विज्ञान, कला और अध्यात्म एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़े थे। सुदामा/ईएमएस 02 फरवरी 2026