राष्ट्रीय
02-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल सीवर सफाई और मैनुअल स्कैवेंजिंग (मैला ढोने) के दौरान होने वाली मौतों को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे हर मामले में अक्टूबर 2023 में दिया गया उसका फैसला लागू होगा, जिसके तहत मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जिन मामलों में मुआवजा पहले ही तय होकर भुगतान किया जा चुका है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने 20 जनवरी को यह अहम स्पष्टीकरण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की ओर से दाखिल एक आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया। नालसा ने कोर्ट को बताया था कि मैनुअल सीवर सफाई से मौत के मामलों में मुआवजे को लेकर अलग-अलग हाईकोर्ट ने भिन्न-भिन्न रुख अपनाया है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले में मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने समान प्रकृति के एक अन्य मामले में मुआवजा राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी थी। इसी असमानता को दूर करने के लिए नालसा ने सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दो टूक कहा कि अक्टूबर 2023 में दिया गया उसका फैसला सभी लंबित मामलों पर लागू होगा। गौरतलब है कि अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल सीवर सफाई के दौरान मौत के मामलों में मुआवजा राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया था। कोर्ट ने इसे मानव गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया था। यह आदेश एक महिला की याचिका पर आया है, जो वर्ष 2022 में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान गंवाने वाले एक सीवर सफाईकर्मी की विधवा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने अगस्त 2023 में मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक उन्हें कोई राशि नहीं मिली है। फैसला नजीर बनेगा सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुआवजा 30 लाख रुपये देने का निर्देश देते हुए यह भी कहा कि यह फैसला न केवल इस याचिकाकर्ता के लिए, बल्कि भविष्य में आने वाले सभी समान मामलों के लिए एक नजीर बनेगा। अदालत ने दोहराया कि मैनुअल स्कैवेंजिंग एक अमानवीय प्रथा है और इसके पूर्ण उन्मूलन की जिम्मेदारी राज्य और संबंधित एजेंसियों की है। हिदायत/ईएमएस 02 फरवरी 2026