क्षेत्रीय
02-Feb-2026
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- इन्क्यूबेटर से लेकर सेमीकंडक्टर और सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग तक, गुजरात के युवा बना रहे हैं संपूर्ण इनोवेशन इकोसिस्टम गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात के युवा आज केवल नए आइडिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्क्यूबेटर से लेकर सेमीकंडक्टर और सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग तक एक संपूर्ण इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं। पहले इनोवेशन और स्टार्टअप केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित थे, लेकिन आज राज्य सरकार के प्रयासों और युवाओं की मेहनत के कारण गुजरात स्टार्टअप क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। जब कभी “स्टार्टअप” शब्द भी अनजान था, वहां से लेकर आज देश का नंबर वन स्टेट बनने तक की यह यात्रा भारतीय युवाओं की क्षमता और परिश्रम का प्रमाण है, जिसकी सराहना आज पूरी दुनिया कर रही है। गुजरात आज स्टार्टअप और एआई टेक्नोलॉजी में अग्रणी राज्य बन चुका है। यह बात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने गिफ्ट सिटी, गांधीनगर में कही। मंत्री अर्जुन मोढवाडिया की अध्यक्षता में गिफ्ट सिटी क्लब, गांधीनगर में “स्ट्रेटेजिक आईपी मैनेजमेंट फॉर इनोवेशन: पेटेंट एनालिटिक्स और फ्रीडम टू ऑपरेट (एफटीओ)” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंत्री के कर-कमलों से विभिन्न इनोवेटर्स को आत्मनिर्भर गुजरात फेलोशिप के तहत रु. 62.84 लाख, आईपी कमर्शियलाइजेशन के अंतर्गत रु. 3 लाख और निधि प्रयास ग्रांट के तहत रु. 21.50 लाख, कुल मिलाकर रु. 87.34 लाख के चेक प्रदान किए गए। मंत्री ने कहा कि इन्क्यूबेटर्स और स्टार्टअप क्षेत्र में कार्यरत युवाओं के लिए यह कार्यशाला “मिनी कुंभ” के समान है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2003 में गुजरात में सबसे पहले विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना की गई थी। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज सावलि टेक्नोलॉजी एंड बिजनेस इन्क्यूबेटर जैसे केंद्र सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के युवा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं। आज सैटेलाइट निर्माण में उपयोग होने वाले सेमीकंडक्टर की डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसी पूरी प्रक्रिया अहमदाबाद स्थित इसरो में इन-हाउस की जा रही है। इससे सैटेलाइट सेमीकंडक्टर का पूरा इकोसिस्टम गुजरात में उपलब्ध हो गया है। साणंद के खोरज जीआईडीसी में देश की पहली सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित की गई है, जहां भारतीय डिजाइन के अनुसार सैटेलाइट बनाए जाएंगे। पहले तीन वर्षों में 6 और अगले तीन वर्षों में 12 सैटेलाइट निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य के युवाओं की बौद्धिक क्षमता का बहुआयामी विकास हो रहा है और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिल रही है। मंत्री ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि असफलता के पीछे ही सफलता छिपी होती है, इसलिए प्रयास कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुजरात में धोलारा सहित चार सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने से इस क्षेत्र में कार्यरत देश का युवा वर्ग वापस लौटेगा। उन्होंने ब्लू इकोनॉमी की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की लंबी समुद्री तटरेखा, समृद्ध खनिज संसाधन, टाइडल एनर्जी, ऑफशोर विंड और पोरबंदर क्षेत्र में मड माइनिंग जैसी संभावनाएं वर्ष 2047 तक ‘विकसित गुजरात से विकसित भारत’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करेंगी। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव पी. भारती ने कहा कि केंद्र सरकार के हालिया बजट में भी युवाओं पर विशेष जोर दिया गया है। वर्ष 2030 तक गुजरात को आर्थिक रूप से शीर्ष तीन राज्यों में पहुंचाने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। बीआईआरएसी के एमडी डॉ. जितेंद्र कुमार, बायो-इंडस्ट्री विशेषज्ञ सुनील पारेख और अन्य वक्ताओं ने भी आईपी, बायोटेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप स्केल-अप और कमर्शियलाइजेशन पर अपने विचार रखे। डीएसटी, एसटीबीआई और बीआईआरएसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और उद्यमियों को स्ट्रेटेजिक आईपी मैनेजमेंट, पेटेंट एनालिटिक्स और फ्रीडम टू ऑपरेट जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। सतीश/02 फरवरी