-एक लाख से अधिक भक्त हुए शामिल सारंगपुर (ईएमएस)। सदियों से चली आ रही परम्परा के अनुरूप पूर्णिमा के पावन अवसर पर मालवांचल के प्रसिद्ध माता बिजासन धाम में माता बिजासन की भव्य पालकी (डोली) शोभायात्रा निकाली गई। रात्रि आठ बजे के बाद शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पालकी सजाई गई और पुजारी परिवार द्वारा माता बिजासन के दिव्य विग्रह को विराजित किया गया। यह परम्परा वर्षों से माताजी के सेवक पण्डाजी परिवार द्वारा श्रद्धा और नियमपूर्वक निभाई जा रही है। मंगलगान, जयघोष और आतिशबाजी के बीच माता की डोली को राज्यमंत्री गौतम टेटवाल सहित जनप्रतिनिधियों, पुजारीगणों, समाजसेवियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने कंधा दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और भक्तिमय वातावरण ने पूरे क्षेत्र को देवीमय बना दिया। - किन्नरों का भावपूर्ण नृत्य पालकी यात्रा का पहला विश्राम बड़ी गादी के समीप रहा, जहाँ ब्यावरा से आए किन्नर समुदाय ने माता के भजनों पर राई-बधाई नृत्य प्रस्तुत कर भक्ति प्रकट की। इसके बाद डोली भेरू महाराज स्थान, भैंसासुर महाराज स्थान, परी माता स्थान, देवनारायण मंदिर, गोपचंद्र जी महाराज मंदिर सहित निर्धारित पड़ावों पर रुकती हुई प्रातः पाँच बजे गांव भ्रमण कर नवदुर्गा मंदिर पहुँची। यहाँ पुजारी मुकेश पण्डा ने माता नवदुर्गा तथा पालकी में विराजित माता बिजासन की आरती-पूजन किया। उल्लेखनीय है कि पहाड़ी से गांव तक लगभग आठ घंटे में पहुँचने वाली माता की डोली, वापसी में मात्र दस मिनट में डेढ़ किलोमीटर की कठिन पहाड़ी चढ़ाई पार कर मंदिर पहुँच जाती है। वापसी के समय भेरू महाराज के पुजारी कन्हैयालाल दिवान सबसे आगे चलते हैं, जिन पर भेरू महाराज का विशेष आशीर्वाद माना जाता है। युवा टोली डोली को दौड़ते हुए ले जाती है—आगे मशालें, बीच में ढोल-नगाड़ों की थाप और पीछे जयकारों के साथ बढ़ती डोली का दृश्य अत्यंत आलौकिक प्रतीत होता है। लाखों भक्तों की उपस्थिति, चाक-चौबंद सुरक्षा पूर्णिमा रात्रि की इस पालकी यात्रा में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर प्रसाद अर्पित किया। कतारबद्ध भक्तों के जयकारों से समूचा मेला परिसर भक्तिरस में डूबा रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने मेला भ्रमण कर अतिरिक्त पुलिस बल को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। रात्रि में एसडीओपी, थाना प्रभारी सहित जिले के विभिन्न थानों का बल सतर्कता के साथ तैनात रहा। कुल मिलाकर, यह आयोजन आस्था, अनुशासन और परम्परा का जीवंत उदाहरण बना—जहाँ श्रद्धा ने समाज को एक सूत्र में पिरो दिया और माता बिजासन की महिमा का विराट दर्शन हुआ। नरेन्द्र जैन, 02 फरवरी, 2026