02-Feb-2026
...


टाइगर स्टेट मप्र में 33 दिनों में 11 बाघों की मौत शहडोल (ईएमएस)। शहडोल जिले के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र में करंट लगने से रविवार रात एक नर और एक मादा बाघ की मौत हो गई। करपा बीट क्षेत्र में हुई इस घटना से वन विभाग में सकते हैं। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल जांच शुरू की गई। वन विभाग को रविवार रात सर्किल मसिरा के आरएफ 382 क्षेत्र के पास एक बाघ का शव मिलने की सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच के दौरान सोमवार तडक़े उसी क्षेत्र में एक बाघिन का शव भी बरामद हुआ। दोनों शव राजस्व क्षेत्र में एक-दूसरे के नजदीक पाए गए, जिससे यह पुष्टि हुई कि उनकी मौत एक ही घटना में हुई है। वहीं इस मामले में राज्य सरकार ने शहडोल के सीसीएफ से जवाब तलब किया है। मामले में लापरवाह वन अफसरों पर कार्रवाई के लिए कहा है। चीफ वाइल्डलाइफ शुभ रंजन सेन ने इस मामले में जांच रिपोर्ट मांगे जाने की पुष्टि की है। दूसरी ओर बाघों की लगातार हो रही मौत के मामले में वाइल्डलाइफ चीफ को हटाने की मांग की जाने लगी है। दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि 2026 में 33 दिनों में 11 बाघों की मौत हो चुकी है। प्रारंभिक जांच और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों बाघों की मौत बिजली के करंट से होने की पुष्टि हुई है। जांच में यह सामने आया है कि एक किसान ने अपनी फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेत में अवैध रूप से बिजली का तार बिछाया था। इसी तार की चपेट में आने से दोनों बाघों की जान चली गई। डीएफओ तरुणा वर्मा ने बताया कि दो बाघों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह मामला वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत एक गंभीर अपराध है। नियमानुसार पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और जांच के सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। वन्य प्राणी विशेषज्ञों का कहना है कि मप्र में बाघों के मामले में जिस तरह से लापरवाही की जा रही है, वह गंभीर और चिंतनीय है। खासतौर पर शहडोल संभाग में भारी लापरवाही हो रही है। बाघों के शिकार पर शहडोल के सीसीएफ से पीसीसीएफ (हॉफ) द्वारा जवाब-तलब कर लापरवाह वन अफसरों पर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन स्थिति पर नियंत्रण के लिए रेंजर, एसडीओ, फॉरेस्टर को सस्पेंड किया जाना चाहिए। बाघों की गणना चल रही और बाघ मर रहे प्रदेश में इस समय बाघों की गणना का काम चल रहा है। 2025 से यह काम शुरू हुआ है जो 2026 में मई तक चलने वाला है। ऐसे में टाइगर एरिया में कैमरे इंस्टाल किए जा रहे हैं और बाघों की मौत हो रही है। इससे सवाल उठता है कि वन विभाग के लोग क्या कर रहे हैं? मप्र में 2025 में 55 बाघों की मौत हुई थी। वर्ष 2026 में 33 दिनों के अंतराल में हुई बाघों की मौत को मिलाकर 21 बाघ-बाघिन की मृत्यु हुई है, इसमें से 11 मप्र में मृत हुए हैं जो बाघों की सुरक्षा पर सवाल है।