अंतर्राष्ट्रीय
03-Feb-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर भारत ने एक ऐसी रणनीतिक जीत हासिल की है, जिसने पूरी दुनिया में भारतीय कूटनीति का लोहा मनवा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पिछले काफी समय से भारत के खिलाफ कड़े टैरिफ लगाने की वकालत कर रहे थे, उन्होंने आखिरकार एक बड़ा यू-टर्न लेते हुए भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर मात्र 18 प्रतिशत कर दिया है। यह घटनाक्रम केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि भारत की उस शांत और प्रभावी विदेश नीति का परिणाम है, जिसके केंद्र में विदेश मंत्री एस. जयशंकर रहे हैं। पिछले कई महीनों से भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर जो तल्खी बनी हुई थी, इस फैसले के बाद उन रिश्तों पर जमी बर्फ अब पिघलती नजर आ रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस संकट को एक अवसर में बदलने की कमान संभाली। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ लगातार बैठकें कीं और स्पष्ट संदेश दिया कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचना है, तो टैरिफ की बाधाओं को हटाना अनिवार्य होगा। जयशंकर की इस साइलेंट डिप्लोमेसी का असर तब दिखा जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयानों की दिशा बदली। बातचीत के इस दौर को अंतिम रूप देने में 2 फरवरी 2026 की तारीख ऐतिहासिक साबित हुई। जब एस. जयशंकर वॉशिंगटन में क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल मीटिंग के लिए मौजूद थे, ठीक उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण फोन कॉल हुई। इस बातचीत में व्यापारिक सौदे को अंतिम रूप दिया गया और ट्रंप ने स्वयं अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि साल 2025 में तैयार हुई थी, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अमेरिका ने इसे रूस की अप्रत्यक्ष मदद करार देते हुए भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत बेस टैरिफ और 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ लगा दिया था। कुल 50 प्रतिशत के इस भारी बोझ ने भारतीय स्टील, एल्युमिनियम और टेक्सटाइल उद्योग की कमर तोड़ दी थी और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता लगभग खत्म हो गई थी। अमेरिका की इस आक्रामक बयानबाजी के बावजूद भारत ने सार्वजनिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय पर्दे के पीछे की कूटनीति (बैक-चैनल डिप्लोमेसी) पर भरोसा जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए एक नया सवेरा बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर की मौजूदगी में इस डील का फाइनल होना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को एक अपरिहार्य रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रहा है। इस कटौती से न केवल भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी, बल्कि अमेरिका में भी महंगाई कम करने में मदद मिलेगी। भारत की यह जीत साबित करती है कि वैश्विक मंच पर शोर मचाने के बजाय तर्कों और निरंतर संवाद के जरिए बड़े से बड़े आर्थिक अवरोधों को भी हटाया जा सकता है। अब भारतीय सामान अमेरिकी बाजारों में अधिक मजबूती के साथ प्रवेश करेंगे, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को एक नई गति मिलना तय है। वीरेंद्र/ईएमएस/03फरवरी2026