राजगढ़ (ईएमएस ) आगर–राजगढ़ को जोड़ने वाला सोयत–गोघटपुर मुख्य मार्ग सोमवार सुबह अचानक बंद हो गया, जब अपनी जमीन का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज किसानों ने सड़क पर तार की जाली लगाकर आवागमन रोक दिया। करीब 25 साल पहले बनी इस सड़क के लिए किसानों का कहना है कि आज तक उनकी निजी भूमि का न तो विधिवत अधिग्रहण किया गया और न ही मुआवजा दिया गया। न्यायालय के आदेश के बाद किसानों ने जमीन अपने उपयोग में लेते हुए मार्ग बंद कर दिया, जिससे हजारों लोग दिनभर परेशान रहे। जानकारी के अनुसार सुबह करीब 10 बजे लाखाबीर बालाजी मंदिर गेट के पास किसानों ने सड़क पर जाली और अवरोधक लगाकर कालीसिंध नदी तक सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही रोक दी। देखते ही देखते लंबी कतारें लग गईं। बसें, एम्बुलेंस, दोपहिया और मालवाहक वाहन वैकल्पिक कच्चे रास्तों से गुजरने को मजबूर हुए। करीब पांच घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। किसानों का आरोप है कि सड़क निर्माण के समय उनकी कृषि भूमि का उपयोग किया गया, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। वर्षों से वे प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे। कई बार आवेदन और ज्ञापन देने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। अंततः किसानों ने न्यायालय की शरण ली। सुसनेर न्यायालय ने 29 जनवरी को अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि अंतिम निर्णय आने तक वादी पक्ष की भूमि से वाहनों को न निकाला जाए और किसानों को परेशान न किया जाए। इस आदेश के बाद किसानों ने प्रशासन को पूर्व सूचना देकर मार्ग बंद करने का निर्णय लिया। इस मामले से करीब 70 से अधिक किसान सीधे प्रभावित बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी सड़क से पूरे क्षेत्र को लाभ मिला, लेकिन जिनकी जमीन गई, उन्हें ही न्याय नहीं मिला। किसानों ने साफ कहा कि जब तक मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, वे अपनी जमीन पर सड़क का उपयोग नहीं होने देंगे। मार्ग बंद होने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा की और स्थिति संभालने का प्रयास किया। दोपहर बाद समझाइश और आश्वासन के बाद करीब 3 बजे किसानों ने जाम खोला, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका। इस दौरान स्थानीय व्यापारियों, विद्यार्थियों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हुई। कई लोग समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच सके। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। किसानों का कहना है कि वे विरोध के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि मुआवजा मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। -निखिल कुमार (राजगढ़)3/2/2026