क्षेत्रीय
03-Feb-2026
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- आधुनिकता के नाम पर आधार को खिसकना ठीक नहीं...? जबलपुर (ईएमएस)। आधुनिकता के नाम पर यदि हम अपने आधार को ही खिसका देंगे तो हमारी धार्मिकता कहा रही? बच्चों की आड़ में अपने चरित्र बल को कमजोर न करें मुनि श्री ने कहा कि बच्चों के मन में मांसाहार के प्रति ग्लानि होना चाहिये मुनि श्री ने कहा कि आजकल वेज एवं ननावेज रिसोर्ट खुल गये है और उसकी किचिन अलग अलग है उसका जबाब देते हुये मुनि श्री ने कहा कि जबलपुर से ही 1997 में समूचे भारत में यह संदेश गया था कि दिन में शादी दिन में भोज, जैन समाज का यह जय घोष था और अधिकांश लोगों ने इसको फालो किया लेकिन धीरे धीरे यह अग्नि ठंडी पड़ गई समय समय पर यदि फूंक मारी गई होती तो उसमें आज भी अग्नि जल रही होती मुनि श्री ने कहा कि समाज को इस विषय पर गंभीरता पूर्वक बिचार करना चाहिये आधुनिकता के नाम पर यदि हम अपने आधार को ही खिसका देंगे तो हमारी धार्मिकता कहा रही? गृह प्रवेश जब दिन में करते हो तो रात्रि में वैवाहिक कार्यक्रम क्यों? मुनि श्री ने कहा कि यह कार्य जागरुकता के साथ आना चाहिये। यह बात मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी ने धर्मप्रभावना समिति तथा दिगम्बर जैन पंचायत, दिगम्बर जैन युवासंघ, श्वेताम्बर जैन समाज द्वारा सामाजिक व्यवस्थाओं के संबंध में आयोजित बैठक में कही, जिसमें कई सामाजिक मुद्दे रखे गये। संचालन अमित जैन पड़रिया ने किया प्रातःप्रवचन सभा में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा हमारी साधना पद्धति में यंत्र मंत्र और तंत्र तीनों विद्याओं का गहरा संबंध है,तथा साधना के दो ही मार्ग है,एक है आराधना तथा दूसरा है ध्यान प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुवोध कामरेड ने बताया मुनि श्री ने संस्कृत भाषा में निवद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस 64 रिद्धि मंत्रों के साथ अर्घ्य अर्पित कराते हुये व्यक्त किये,उन्होंने ध्यान और आराधना में अंतर स्पष्ट करते हुये कहा कि ध्यान में खुद का आलंबन लिया जाता है,और यह एक खुद के साथ खुद की शुद्धिकरण की प्रक्रिया है जबकि आराधना में बाहर के परमात्मा का आलंबन लिया जाता है, तथा उस आलंबन के माध्यम से हम अपने भीतर के परमात्मा से जुडऩे का उपक्रम करते है,उन्होंने कहा कि ध्यान की गहन साधना में उतरने के लिये सबसे पहले मन और इन्द्रिय पर विजय प्राप्त करना बहूत जरुरी है, कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः6:30 बजे मंगलाष्टक के साथ भगवान का अभिषेक एवं मुनि श्री के मुखारविंद के साथ शांतिधारा से हुई तत्पश्चात नित्यनियम पूजन एवं विधान प्रारंम किया गया तथा 64 रिद्धि मंत्रों के साथ मुनि श्री के मुखारविंद से अर्घ समर्पित कराये गये एवं विधान के पांचवें दिवस 128 अर्घ्य प्रभु की भक्ति में समर्पित कराये जाऐंगे। इस प्रकार प्रतिदिन दुगने क्रम से अर्घ समर्पित होंगे।प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्र. अशोक भैया,बाल ब्र.अभय भैया ने सभी मांगलिक क्रियायें संपन्न करायी। सुनील साहू / मोनिका / 03 फरवरी 2026