* गुजरात के ऊना तालुका के चिखली गांव के मछुआरे भगाभाई बामणिया की 16 जनवरी को मौत, मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप अहमदाबाद (ईएमएस)| पाकिस्तान की कराची जेल में बंद गुजरात के जूनागढ़ जिले के ऊना तालुका के चिखली गांव निवासी भारतीय मछुआरे 38 वर्षीय भगाभाई बामणिया की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद पाकिस्तान के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। 16 जनवरी को उनके निधन की पुष्टि हुई है। इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें गंभीर हालत में अस्पताल के बिस्तर पर इलाज के दौरान भगाभाई बामणिया को लोहे की बेड़ियों से बांधकर रखा गया दिखाई दे रहा है। इस घटना से मछुआरा समुदाय में पाकिस्तान के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है। बीते कुछ वर्षों से पाकिस्तान की जेलें भारतीय मछुआरों के लिए ‘मौत की जेल’ बनती जा रही हैं। जेल में बंद भारतीय मछुआरे बीमार पड़ने पर उचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में अपनी जान गंवा रहे हैं। इसी कड़ी में 38 वर्षीय भगाभाई बामणिया का नाम भी जुड़ गया है। जानकारी के अनुसार, भगाभाई बामणिया कराची जेल में बंद थे। अचानक बीमार पड़ने पर उन्हें कराची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 16 जनवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली। इलाज के दौरान उनके पैरों में लोहे की बेड़ियां लगाकर अस्पताल के बिस्तर से बांधकर रखने का आरोप लगा है। इस अमानवीय व्यवहार को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताते हुए समुद्र सुरक्षा श्रमिक संघ के अध्यक्ष बालूभाई सोचा ने पाकिस्तान के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बालूभाई सोचा वर्ष 2000 से भारतीय मछुआरों की समस्याओं को उजागर करने और उन्हें राज्य व केंद्र सरकार के समक्ष रखने का कार्य कर रहे हैं। वे इस मुद्दे पर पहले भारत के प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं। उनका कहना है कि हर साल भारतीय मछुआरों का अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास से पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अपहरण किया जाता है। वर्तमान में भी करीब 200 भारतीय मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। मृतक भगाभाई बामणिया को 18 फरवरी 2022 को पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी नाव ‘बुराक’ सहित पकड़ लिया था। इसके बाद उन्हें अन्य मछुआरों के साथ कराची जेल में रखा गया। अंततः 16 जनवरी 2026 को उनकी मौत हो गई। भगाभाई बामणिया के परिवार में उनकी वृद्ध मां, पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सतीश/04 फरवरी