-मंदिर में रेलिंग का ठेका लेने वाले सलीम ने कहा- भगवान जिससे चाहे काम लें मेरठ,(ईएमएस)। बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने के काम को लेकर उठे विवाद के बीच ठेकेदार ने पहली बार फर्म के नाम, पार्टनरशिप और अपने रोल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। ठेकेदार का कहना है कि जिस फर्म के जरिए काम किया जा रहा है, उसका नाम कनिका है और यह कोई नई या फर्जी फर्म नहीं, बल्कि सालों पुरानी पार्टनरशिप का हिस्सा है, जिसमें हिंदू पार्टनर भी शामिल हैं। ठेकेदार सलीम खान ने कहा कि इस पूरे मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि हकीकत इससे अलग है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सलीम ने बताया कि फर्म का नाम किसी पहचान छिपाने के लिए नहीं, बल्कि पारिवारिक और व्यावसायिक संबंधों से जुड़ा है। करीब 10–15 साल पहले उनके एक हिंदू दोस्त और पार्टनर थे। उसी दौरान जब फर्म बनाई गई, तो उनके पार्टनर की बेटी के नाम पर ही कनिका नाम रखा गया। हमने कोई नाम बदलकर काम नहीं लिया। फर्म पहले से रजिस्टर्ड है और पार्टनरशिप में आज भी हिंदू पार्टनर रंजन शर्मा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पार्टनरशिप फर्म में नाम, दस्तावेज और जिम्मेदारियां सब कुछ साफ दर्ज है। ठेकेदार ने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में चल रहे काम से वह खुद को जानबूझकर दूर रखते हैं, ताकि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो। उन्होंने बताया कि साइट रंजन शर्मा देखते हैं। कारीगर भी सभी हिंदू हैं। मैं ज्यादातर फैक्ट्री में रहता हूं। उनका कहना है कि वह एक-दो बार साइट पर गए जरूर हैं, लेकिन मंदिर के अंदर नहीं गए। बातचीत में सलीम खान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनके लिए यह काम किसी ठेके से ज्यादा सेवा का विषय है। उन्होंने कहा कि भगवान जिसे चाहे अपनी सेवा का मौका दे सकते हैं और इसमें किसी इंसान की हैसियत नहीं कि वह तय करे। सलीम ने यह भी माना कि इस काम के लिए कोई औपचारिक टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उनके मुताबिक मंदिर समिति की बैठक में तकनीकी चर्चा के बाद मौखिक रूप से काम शुरू करने को कहा गया। बैठक में कई लोग थे, इंजीनियर थे। सबके सामने तय हुआ। अगर यह गलत था, तो उस वक्त आपत्ति क्यों नहीं हुई? उन्होंने बताया कि अब तक 40 से 50 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं और कुछ भुगतान मंदिर समिति की ओर से मिला भी है। सलीम का आरोप है कि असल मुद्दों से ध्यान हटाकर अब पूरा मामला उनके नाम और पहचान तक सीमित कर दिया गया है। काम की गुणवत्ता, सुरक्षा और व्यवस्था पर कोई सवाल नहीं उठा रहा। बस नाम पर विवाद खड़ा कर दिया गया। सलीम खान ने कहा कि रेलिंग लगाने का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा है, न कि किसी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना। दूसरी ओर हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर होने वाले कार्यों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी तरह का भ्रम या संदेह नहीं रहना चाहिए। हालांकि, सलीम खान का दावा है कि अगर जांच होती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी। सिराज/ईएमएस 04फरवरी26