क्षेत्रीय
04-Feb-2026
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- लखनऊ से ले जाकर इंदौर और देवास में देना थी डिलेवरी - आरपीएफ ने पहले ही दबोच लिया, वन विभाग-एसटीएफ की टीम करेंगी जॉच भोपाल(ईएमएस)। राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके में स्थित संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल ने मंगलवार को वन्य जीव तस्करी का बड़ा खुलासा किया है। आरपीएफ स्टाफ ने पटना-इंदौर एक्सप्रेस (19322) के एच-1 कोच के संदिग्ध नजर आ रहे कोच अटेंडर की तलाशी ली जिसमें उसके पास दो बैगों में भरे 311 जीवित इंडियन टेंट टर्टल (कछुए) बरामद हुए हैं। आरोपी बीते काफ समय से रेलवे कोच अटेंडर का काम करता है। आरपीएफ ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की टीम मौके पर पहुंची और संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई। शुरुआती पूछताछ में आरोपी अजय सिंह राजपूत ने बताया कि, वो ढाई हजार रुपए के लालच में कछुओं को देवास और इंदौर पार्सल करने ले जा रहा था। मिली जानकारी के अनुसार आरपीएफ की टीम ट्रेन में अवैध रुप से नशीले पदार्थो की तस्करी करने वाले संदिग्धो की सर्चिंग कर रही थी। इस दौरान टीम को कोच अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार के पास दो बैग रखे नजर आये। आरोपी अजय फर्स्ट एसी कोच का अटेंडेंट था। कोच में उसके पास निजी केबिन और बेडरोल स्टोरेज की सुविधा थी। दोनों बैग उसी सामान के बीच रखे गए थे। रूटीन चेकिंग के दौरान संदेह के आधार पर जब उससे बैगो के बारे में पूछताछ की गई तब वह असामन्य हो गया। इसके बाद जब उन बैगो की तलाशी ली गई तो उसमें छोटे-छोटे 311 जीवित इंडियन टेंट टर्टल बरामद हुए। आरपीएफ अफसरो के मुताबिक आगे की पूछताछ में पता चला कि आरोपी कोच अटेंडेंट अजय मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है, और वेस्टर्न रेलवे के इस रेक के मेंटेनेंस और स्टाफ सप्लाई का ठेका लेने वाली निजी एजेंसी के जरिए नौकरी पाकर करीब चार साल से ट्रेन में बतौर अटेंडेंट काम कर रहा है। हालांकि आरोपी ने बीच में कुछ समय के लिए काम छोड़ दिया था, लेकिर बाद में दोबारा इसी ट्रेन में ड्यूटी पर लौट आया था। कछुओ के सबंध में पूछताछ करने पर अजय ने बताया कि उसे लखनऊ में एक व्यक्ति ने दो बैग सौंपे थे। कहा था, कि एक बैग देवास और दूसरा इंदौर में सौंपना है। देवास में बैग देने पर एक हजार और इंदौर में दूसरे बैग के लिए पंद्रह सौ रुपए मिलने थे। पैसों के लालच में आकर वह पहली बार तस्करी करने का काम करने को तैयार हो गया था। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है, कि फिलहाल मामला बड़े संगठित तस्करी नेटवर्क जैसा नहीं लग रहा, लेकिन लखनऊ से जुड़े संपर्कों और डिलीवरी पॉइंट्स की जांच की जा रही है। वन विभाग अधिकारियो के अनुसार बरामद कछुए इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के है। ये वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं। इनका कवच तंबू के आकार का होता है, इसलिए इन्हें ‘टेंट टर्टल’ (भारतीय तंबू कछुआ) कहा जाता है। इन कछुओ को घरों में सजावट के लिए एक्वेरियम में रखने का शौक बढ़ रहा है, जिसके चलते इनकी तस्करी भी बढ़ रही है। इनका पालन, परिवहन और बिक्री प्रतिबंधित है। मामले में आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला कायम किया गया है। इक्वेरियम कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है की छोटे कछुओं की कीमत बाजार में करीब दो हजार से पांच हजार रुपए तक होती है। इस हिसाब से 311 कछुओं की यह खेप अवैध बाजार में लाखों रुपए की हो सकती थी। वन विभाग की टीम ने सभी 311 कछुओं को अपने संरक्षण में ले लिया है। अधिकारियों के मुताबिक ये कछुए साफ और बहते पानी में ही जीवित रह पाते हैं, इसलिए इन्हें प्राकृतिक जल स्रोतों में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाएगा। जुनेद / 4 फरवरी