क्षेत्रीय
04-Feb-2026
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- कोर्ट ने कहा कि जब डकैती के आरोप में पांच से कम अभियुक्तों का परीक्षण हुआ हो तो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-395 के तहत दोषसिद्धि नहीं की जा सकती प्रयागराज (ईएमएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1975 के डकैती मामले में दोषसिद्धि को पलटते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब डकैती के आरोप में पांच से कम अभियुक्तों का परीक्षण हुआ हो तो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-395 के तहत दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने रामफल व अन्य की ओर से दायर याचिका पर दिया। अपील सत्र न्यायालय झांसी की ओर से 24 अप्रैल 1984 को पारित उस निर्णय के खिलाफ दाखिल की गई थी। इसमें आरोपी रामफल और धुरम को आईपीसी की धारा-395 के तहत 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार 19 जनवरी 1975 को झांसी के गरौठा थाना क्षेत्र के पियरघाटा के पास 8-9 बदमाशों द्वारा राहगीरों से लूट की जा रही थी। पुलिस मुठभेड़ के बाद रामफल और धुरम ने आत्मसमर्पण किया, जबकि अन्य आरोपी फरार हो गए थे। जांच के दौरान छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी, जिनमें से दो को पहले ही डिस्चार्ज कर दिया गया। दो अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया। इस प्रकार डकैती के आरोप में केवल चार अभियुक्तों के खिलाफ विचारण हुआ, जो कानूनन सही नहीं है। जितेन्द्र 04 फरवरी 2026