लेख
05-Feb-2026
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महाराष्ट्र के उप मुख्य मंत्री के आकस्मिक निधन से ऐ सवाल उठा क्या हर मनुष्य की आयु निश्चित है? और उतना ही सांसे ईश्वर ने दिए हैं जितना जीना है आखिर समय से पहले लोग दुनिया से क्यों जाते हैं क्योंकिऐसा सुनने में तो काफी बार आता है। बहुत सारे विश्वप्रसिद्ध मनोविज्ञानी भी इस बात की पुष्टी करते हैं। बहुत बार लोग अपने पुनःजन्म की बातें भी करते हुए पाए जाते हैं। इससे तो ऐसा ही लगता है कि अतीत में जाया जा सकता है। इसके अलावा अगर हम दैनिक जीवन की घटनाओं पर गौर करें तब भी ऐसा लगता है। क्या शाम के समय आपको याद नहीं आता कि सुबह आपने क्या किया था, या फिर जब आप बहुत छोटे थे उस समय की घटनाऐं याद करने पर याद आती भी हैं। इसके अलावा भी चार सो किलोमीटर दूर से आपने अपने कैमरे से फोटो खैंची तो क्या वह अभी की है या कुछ समय पहले की? भगवान श्रीकृष्ण ने जो गीता का ज्ञान दिया था क्या वह एक जन्म में ग्रहण करना संभव है? श्री कृष्ण ने जन्मजन्मांतर से ज्ञान इक्कठा किया था, पहले लोग लड़ाई में मारे जाते थे उनकी तो समय से पहले मौत हुई वो भी ईश्वर की मर्जी होगी मनुष्य हमेशा भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। अगर उसे किसी ने भविष्यवाणी कर दी कि वह 90 वर्ष तक जियेगा, तो शायद वह निश्चिन्त होकर बैठ जाए और किसी बात की परवाह ना करे। कर्मों के साथ भी मनुष्य का यही रवैया रहता है। अगर उसके भाग्य में सफलता है और उसे यह पता चल जाए, तो शायद वह कभी ज्यादा प्रयास ही ना करे। मनुष्य का स्वभाव ही कुछ ऐसा है लेकिन इन सबमें वह यह भूल जाता है कि उसका भाग्य उसके कर्म द्वारा निर्धारित किया गया है। उसके संचित कर्म (पूर्व जन्मों के अच्छे कर्म) हैं, जो उसे इस जन्म में अच्छा जीवन दे रहे और अगर वह इस जन्म के कर्मों की परवाह नहीं करता है, तो उसके पुण्य कर्म का खाता कम होता जाएगा और साथ में उसके भाग्य में भी बदलाव होगा। लोग अक्सर कर्म की अनदेखी कर देते हैं जबकि कर्म ही उनके हरेक जीवन की नींव रखता है। अब सवाल यह है कि अगर किसी के अच्छे पुण्य कर्म से उसे लम्बी आयु प्राप्त होती है, तो क्या समय से पहले उसकी मृत्यु संभव है, चाहे वो अकाल मृत्यु हो या समय से मृत्यु के निकट होने के सामान्य लक्षणों में चिंता, थकान, भूख न लगना और कब्ज शामिल हैं। जैसे-जैसे मृत्यु निकट आती है, मूत्र असंयम, प्रलाप और सांस लेने में घरघराहट जैसी आवाजें सुनाई देने लगती हैं।आप एक बात से समझ सकते हैं हाल ही एयर इंडिया का बोइंग विमान अहमदाबाद में क्रेश हुआ एक को छोड़ कर सभी की मौत हुई लेकिन उसमें किसी के बचने की बिलकुल सम्भावना ही नहीं थी जो स्व अजीत पवार पूर्व उप मुख्य मंत्री के विमान क्रैश में सभी सभी लोग मौत के मुँह में समा गए अतः जिसकी जितनी आयु परमात्मा ने लिखा है उससे ना तो बदला जा सकता है ना ही टाला जाता है मृत्यु किसकी कब होगी और कौन कितना जियेगा, इसका कोई पैमाना नहीं है। इसे केवल ईश्वर भगवान राम ही बता सकते हैं।क्योंकि किसी भी मृत्यु से पहले उसे अंदेशा मिलने लगता है और जब अंतिम यात्रा निकलती है तो हिन्दू धर्म में राम नाम सत्य ही बोला जाता है लेकिन कई लोग ज्योतिष और ग्रहों के अनुमान से अपनी आयु की अवधि का पता लगा लेते हैं। एक बार उम्र का पता लगा लेने के बाद कई लोग फिर कर्मों की परवाह नहीं करते। लेकिन शास्त्र कहते हैं कि अगर आप लगातार गलत कर्म या पाप करते हैं, तो उससे आपके पुण्य कर्म क्षय होते हैं। कई सारे ऐसे कर्म हैं, जो आपको परिणाम बहुत बाद में या अगले जन्म में देते हैं लेकिन कुछ कर्म ऐसे हैं, जिसका फल आपको तुरंत मिल जाता है अतः उसी तरह मौत भी आपके पूर्व जन्मो के कर्म के आधार पर किसी घटना का बहाना बनाकर घटी घटना क्रिया विज्ञान (फिनामेंलॉजी ) दर्शनशास्त्र और अनुसंधान की एक विधि है जो मानवीय अनुभवों और चेतना की संरचनाओं का अध्ययन करती है, जिसमें व्यक्ति किसी घटना या वस्तु को कैसे अनुभव करता है और उसका क्या अर्थ निकालता है, इस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, यह बाहरी व्याख्याओं के बजाय प्रत्यक्ष, व्यक्तिपरक अनुभवों को समझने पर ज़ोर देता है।इसे इस बात से समझ सकते हैं क़ोई सिगरेट पीता है वह भी करीब 80 साल या उससे अधिक जी लेता है लेकिन कहा जाता है कि इससे मौत जल्दी हो जाएगी जबकी न पी पाने वाले उससे पहले दुनिया से चले जाते हैं फार्मा में तमाम तरीके की दवाई बनती है लेकिन सबका एक्सपायरी डेट एक नहीं होता है उसके केमिकल कंपोजीशन के अनुसार अलग अलग एक्सपायरी डेट होता है उसी तरह बॉडी में भी मौत से पहले आपको रोग आते हैं जो मौत का कारण बनता है घटना को रोका नहीं जा सकता है जो ईश्वर की मर्जी से ही होता है बाइबल के प्रश्नों के उत्तर Menu icon पता लगाएं कि कैसे ... भगवान के साथ अनंत काल बिताओ भगवान से क्षमा प्राप्त करें प्रश्न क्या जीवन जीने के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित है? उत्तर बहुत से लोग उत्पत्ति 6:3 को 120- वर्षों तक मनुष्य के लिए जीवित रहने की आयु सीमा के रूप में समझते हैं, तब यहोवा ने कहा, मेरा आत्मा मनुष्य से सदा लों विवाद करता न रहेगा, क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है; उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी। तथापि, उत्पत्ति 11 अध्याय 120 वर्षों से अधिक आयु के कई लोगों को वर्णित करती है। परिणामस्वरूप, कुछ उत्पत्ति 6:3 की व्याख्या इस अर्थ में करते हैं, एक सामान्य नियम के रूप में, लोग 120 वर्षों की आयु सीमा से अधिक जीवित नहीं रहेंगे। जल प्रलय के पश्चात्, जीवन अवधि नाटकीय रूप से सिकुड़ने लगी (उत्पत्ति 5 की तुलना उत्पत्ति 11 से करें) और अन्त में यह 120 वर्षों की आयु तक हो गई (उत्पत्ति 11:24)। उस समय से लेकर, बहुत से लोगों ने 120 वर्षों तक के जीवन को व्यतीत किया है। तथापि, एक और व्याख्या उत्पत्ति 6:3 के अनुसार, जो आभासित होता है कि इस संदर्भ के बहुत अधिक अनुरूप पाई जाती है, परमेश्विर की घोषणा यह थी कि जल प्रलय उसके द्वारा दिए जाने वाले दण्ड की घोषणा के 120 वर्षों के पश्चात् घटित होगा। मनुष्य के दिन स्वयं मनुष्य के सदंर्भ में ही जल प्रलय के कारण नष्ट हो गए। कुछ लोग इस सच्चाई के पश्चात् भी इस व्याख्या के ऊपर विवाद करते हैं कि नूह ने जहाज का निर्माण तब किया जब उसकी उम्र उत्पत्ति 5:2 के अनुसार 500 वर्षों की थी और जल प्रलय तब आई जब नूह 600 वर्षों का हुआ (उत्पत्ति 7:6); यह केवल 100 वर्षों का, न कि 120 वर्षों का समय है। इसके अतिरिक्त, उत्पत्ति 5:32 में लिखे हुए समय के विषय में नहीं जिसमें परमेश्वेर ने नूह को जहाज का निर्माण करने का आदेश दिया, अपितु इसकी अपेक्षा यह नूह की तब की उम्र है जब वह तीन पुत्रों का पिता बन चुका था। यह पूर्ण रीति से विश्वमसनीय हो सकता है कि परमेश्वीर ने जल प्रलय को 120 वर्षों के पश्चात् प्रगट होने के लिए निर्धारित किया हो और तब उसके नूह को जहाज का निर्माण करने के आदेश को दिए जाने के पश्चात् कई वर्षों तक प्रतीक्षा की होगी। चाहे कुछ भी क्यों न रहा हो, उत्पत्ति 5:32 और 7:6 के मध्य के 100 वर्ष किसी भी तरह से उत्पत्ति 6:3 में उल्लिखित 120 वर्षों के विरोधाभासी नहीं हैं। जल प्रलय के कई वर्षों के पश्चात्, मूसा ने घोषणा की थी, हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं - और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष भी हो जाएँ, तौभी उनका घमण्ड केवल कष्ट और शोक ही शोक है, वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं। (भजन संहिता 90:10)। न तो उत्पत्ति 6:3 न ही भजन संहिता 90:10 मनुष्य के लिए परमेश्वदर की ओर से निर्धारित आयु सीमा है। उत्पत्ति 6:3 जल प्रलय की भविष्यद्वाणी की समय सारिणी है। भजन संहिता 90:10 तो केवल इतना ही कह रही है कि एक सामान्य नियम के रूप में, लोग 70-80 वर्षों तक जीवित रहते हैं जो कि आज के समय की सत्य बात है, लेकिन आपदा महामारी सब ईश्वर की मर्जी से होता है उसमें गरीब या अमीर नहीं देखता है जिसे दुनिया जाना तय है उसे जाना ही पड़ता है किस धर्म में क्या लिखा है वो इतना जानने की जरुरत नहीं है कर्म करें और मस्त रहें जो होगा देखा जायेगा मौत तो आना तय है तो आज हो या जल शोक नहीं करना चाहिए उसने आपमें जितनी चाबी भरी है उतना ही चलेगा सब ऊपर वाले की मर्जी से होता है इसलिए महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कर्तव्य का पालन: श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और कर्तव्य का पालन करना चाहिए। अर्जुन एक क्षत्रिय थे, और उनका धर्म युद्ध करना था, इसलिए उन्हें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। ईएमएस / 05 फरवरी 25