इन्दौर (ईएमएस) अष्टम अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश अनीता सिंह की कोर्ट ने दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धमकी के आरोपी आमिर अली की जमानत याचिका पर सुनवाई दौरान लोकअभियोजक द्वारा आरोपी को जमानत देने का विरोध करने तथा मामले की गंभीरता, पीड़िता के बयान और केस डायरी में दर्ज तथ्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इंकार कर उसकी जमानत याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने केस डायरी, पीड़िता के बयान और दस्तावेजों के आधार पर माना कि आरोपों की प्रकृति गंभीर है और आरोपी को रिहा करने से जांच व न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने सहआरोपी के विदेश चले जाने के तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं बनता, इसलिए आवेदन निरस्त किया जाता है। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि आरोपी आमिर अली को खजराना थाना पुलिस ने 30 नवंबर को दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धमकी के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसने जमानत याचिका में दलील दी कि केस करीब साढ़े तीन साल बाद दर्ज कराया गया। सारे आरोप निराधार हैं। जबकि खजराना थाना पुलिस को दर्ज केस में पीड़िता ने बताया था कि आरोपी आमिर अली के परिचित मोहित उर्फ सूफीयान ने अपनी पहचान छिपाकर उससे मोहित नाम बता पहले दोस्ती की और विश्वास में लेकर संबंध बना फोटो वीडियो बना लिए फिर उन्हें वायरल करने की धमकी देते आमिर उर्फ गोल्डन ने भी होटल में ले जाकर जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपी पर मारपीट कर पैसे की उगाही और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने के भी आरोप लगाए थे। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर विवेचना उपरांत प्रकरण चालान कोर्ट में पेश किया था। जिसके बाद उसने जमानत याचिका लगाई जिसकी सुनवाई उपरांत सक्षम न्यायालय ने इस टिप्पणी के साथ कि आरोपी को रिहा करने से जांच व न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है उसे निरस्त कर आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया। आनंद पुरोहित/ 05 फरवरी 2026