क्षेत्रीय
05-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। एक एचआईवी पीड़ित व्यक्ति द्वारा एआई और मेडिकल स्टोर की सलाह पर एंटीवायरल दवा लेने से उसकी जान खतरे में पड़ गई। यह घटना भारत में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) के बढ़ते संकट को दर्शाती है, जहां आधी एंटीबायोटिक्स बिना पर्चे के बिकती हैं। इससे प्रतिवर्ष लाखों मौतें होती हैं। निगरानी की कमी और अवैध बिक्री इस गंभीर जन स्वास्थ्य चुनौती को और बढ़ा रही है। यह एक बानगी है मेडिकल स्टोर पर जाकर सीधे एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या इस जैसी अन्य एंटीमाइक्रोबियल दव खरीदने और खाने से होने वाले नुकसान की। लोगों के अपनी मर्जी से एंटीचायोटिक खाने को प्रवृत्ति एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) जैसे घातक संक्ट को जन्म दे रही है, जो जन स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। चिंता की बात यह है कि देश में बिकने वाली कुल एंटीबायोटिक्स में से आधी बिना पर्चे के बिक रही है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/05/ फरवरी/2026