राष्ट्रीय
05-Feb-2026
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-तमिलनाडु चुनाव में उत्तर–दक्षिण विवाद गहराया चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले भाषा और पहचान की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। डीएमके सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री की विवादित टिप्पणी ने राज्य में उत्तर–दक्षिण विवाद को हवा दे दी है और ‘हिंदी थोपने’ बनाम द्विभाषा नीति की बहस को फिर तेज कर दिया है। तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, कि उत्तर भारत से आने वाले लोग केवल हिंदी जानने के कारण राज्य में सीमित रोजगार पाते हैं और उन्हें टेबल साफ करने, निर्माण मजदूरी करने या पानी पूरी बेचने जैसे काम करने पड़ते हैं। इसके उलट उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति तमिल और अंग्रेजी के कारण राज्य के युवा विदेशों में अमेरिका और लंदन जैसे देशों में जाकर अच्छी नौकरियां और ऊंची आय हासिल कर रहे हैं। मंत्री के इस विवादित बयान को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा ने इसे उत्तर भारतीय प्रवासियों का अपमान बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां राज्य में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे सकती हैं। साथ ही इंडिया ब्लॉक के नेताओं, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए हैं। वरिष्ठ नेताओं ने बयान से बनाई दूरी जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री के बयान से दूरी बनाने की कोशिश की। डीएमके सांसद टी. आर. बालू ने कहा कि पन्नीरसेल्वम के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि डीएमके और द्रविड़ आंदोलन की शुरुआत से ही हिंदी थोपने के विरोध में रही है और पार्टी का रुख किसी समुदाय या क्षेत्र विशेष के खिलाफ नहीं है। सपा सांसद बोले- उत्तर भारत का अपमान इस बयान पर तमिलनाडु के बाहर से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने टिप्पणी को घटिया बताते हुए कहा कि यह पूरे उत्तर भारत का अपमान है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत ने देश को आधे से अधिक प्रधानमंत्री दिए हैं और इस तरह के बयान क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ाते हैं। हिदायत/ईएमएस 05फरवरी26