राष्ट्रीय
05-Feb-2026


* 50% से घटकर 18% हुआ आयात शुल्क, निर्यात, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा संबल सूरत (ईएमएस)| अमेरिका ने भारतीय माल पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को तत्काल प्रभाव से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से भारत के हीरा और आभूषण उद्योग को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले छह महीनों से संकट के दौर से गुजर रहा था। अमेरिका भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर का सबसे बड़ा बाजार है, जहां कुल निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा जाता है। सालाना करीब 10 अरब डॉलर का निर्यात होता है, जिसमें से 7 से 8 अरब डॉलर केवल हीरे का होता है। हालांकि वर्ष 2025 में अमेरिका ने पहले 25 प्रतिशत और फिर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके चलते अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय हीरा-आभूषण का अमेरिका को निर्यात 6.95 अरब डॉलर से घटकर 44.4 प्रतिशत गिरते हुए मात्र 3.86 अरब डॉलर रह गया था। दिसंबर 2025 में तो यह गिरावट 50 प्रतिशत से भी ज्यादा दर्ज की गई थी। यूरोपीय यूनियन के 27 देशों के साथ ट्रेड डील और अब अमेरिका द्वारा टैरिफ में कटौती से डायमंड इंडस्ट्री को फिर से बड़े बाजार मिलने की उम्मीद है। सूरत के कतारगाम स्थित इंडियन डायमंड इंस्टीट्यूट के चेयरमैन दिनेश नवाडिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारी टैरिफ के कारण सूरत की पॉलिशिंग यूनिट्स में लाखों कामगारों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा था। उद्योग पर मार्जिन का भारी दबाव था और कैशफ्लो भी प्रभावित हुआ था। अब 18 प्रतिशत टैरिफ से उद्योग में नई ऊर्जा का संचार होगा। संस्थागत इक्विटी रिपोर्ट के अनुसार इससे निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर माल बेचने का अवसर मिलेगा और नए ऑर्डर मिलने शुरू होंगे, जिससे मध्यम अवधि में विकास और रोजगार को मजबूती मिलेगी। नवाडिया ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि यूरोप के बाद अमेरिका का यह फैसला जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए लंबी अवधि में बड़ा आर्थिक लाभ लाएगा। इससे अमेरिकी खरीदार फिर से भारतीय हीरे और आभूषण की ओर रुख करेंगे। लैब ग्रोन डायमंड की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद प्राकृतिक हीरों की मांग भी मजबूत बनी रहेगी। सूरत डायमंड एसोसिएशन के खजांची शांति जी धनाणी ने कहा कि टैरिफ घटने से खासतौर पर सीवीडी और एचपीएचटी डायमंड सेक्टर में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। सूरत की फैक्ट्रियों में करीब 8 से 10 लाख रत्न कलाकार कार्यरत हैं, जिन्हें अब काम का बोझ बढ़ने से स्थिर आय मिलेगी। इसके साथ ही सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में बंद पड़ी इकाइयां भी दोबारा शुरू होंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। एसोसिएशन के पूर्व सचिव दामजी मावाणी ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों में “बूस्टर डोज” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत का सीधा फायदा हीरा उद्योग को मिला है। ऊंचे टैरिफ के कारण अमेरिका और यूरोप में मांग सुस्त थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदलेंगे। वहीं एसोसिएशन के सचिव धीरू सवाणी ने कहा कि टैरिफ में कटौती से विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी और पूरे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। उद्योग जगत को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हीरा निर्यात में तेज वृद्धि होगी और सूरत-मुंबई के डायमंड हब एक बार फिर पूरी रफ्तार से चमक उठेंगे। सतीश/05 फरवरी