लखनऊ,(ईएमएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पटरी दुकानदारों के हित में बड़ा आदेश दे दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट-2014 के तहत जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी शहर का सर्वेक्षण पूरा नहीं करती और इस संबंध में स्ट्रीट वेंडिंग सर्टिफिकेट (विक्रय प्रमाणपत्र) जारी नहीं करती, तब तक किसी भी वर्तमान पटरी की दुकानों को न हटाया जाए, बशर्ते वे यातायात के सुचारु रूप से चलने में बाधा न बन रहे हों। न्यायालय ने आदेश के बाद मामले को तीन माह पश्चात सूचीबद्ध करने के निर्दश दिए हैं, साथ ही नगर निगम, लखनऊ को वेंडिंग प्लान बनाने को कह दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अमीनाबाद के पटरी दुकानदारों अमर कुमार सोनकर व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। न्यायालय ने कहा कि जब तक विधि अनुसार सर्वेक्षण पूरा नहीं होता, राज्य सरकार द्वारा वेंडिंग योजना को स्वीकृति नहीं मिल जाती तथा सभी पात्र पटरी दुकानदारों को वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो जाते, तब तक धारा 3(3) के तहत इसतरह के दुकानदारों को वैधानिक संरक्षण प्राप्त रहेगा। न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि याचियों सहित सभी मौजूदा स्ट्रीट वेंडरों के साथ स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के प्रविधानों के अनुसार ही व्यवहार होगा। याचियों का कहना था कि सर्वेक्षण पूरा हो गया है, लेकिन अब तक प्रमाणपत्र नहीं जारी किया गया। वहीं नगर निगम ने स्वीकार किया कि वेंडिंग प्लान तैयार किया गया है, लेकिन उस प्लान को अब तक राज्य सरकार की स्वीकृति नहीं मिली है। आशीष दुबे / 05 फरवरी 2026