- कथित मानसिक प्रताड़ना से आहत आईएफएस विपिन पटेल ने दिया इस्तीफा, - एक और अधिकारी भी सेवा छोड़ने के मूड में भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश के जंगल महकमे में असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। 2013 बैच के आईएफएस अधिकारी विपिन पटेल के इस्तीफे के बाद विभाग के भीतर मंथन तेज हो गया है। 12 वर्षों की सेवा के बाद दिए गए त्यागपत्र ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अफसरों के भीतर दबे असंतोष को भी उजागर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से विपिन पटेल को एक शीर्ष अधिकारी द्वारा प्रशासनिक रूप से लगातार मानसिक दबाव में रखा जा रहा था। यही वजह उनके इस्तीफे के पीछे मानी जा रही है। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े का कहना है कि वास्तविक कारण जानने के लिए संबंधित सीसीएफ को विपिन पटेल से चर्चा करने को कहा गया है। व्हाट्सऐप ग्रुप में गूंजा इस्तीफे का असर वर्तमान में डीएफओ वर्किंग प्लान जबलपुर के पद पर पदस्थ विपिन पटेल ने मंगलवार शाम आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सऐप ग्रुप में अपना त्यागपत्र साझा किया। उन्होंने रीवा, दमोह, सतना और अनूपपुर में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए सहयोग के लिए सभी का आभार जताया और सेवा से अलग होने की घोषणा की। इस्तीफे पर वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। एक सीनियर आईएफएस ने इसे जल्दबाजी बताया, जबकि अन्य अधिकारियों ने विभाग के लिए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और शीर्ष स्तर पर आत्ममंथन की जरूरत जताई। जबलपुर के अधिकारी की टिप्पणी से छलका दर्द इसी कड़ी में जबलपुर में पदस्थ एक अधिकारी की टिप्पणी ने विभागीय माहौल की गंभीरता को और उजागर कर दिया। अधिकारी ने ग्रुप पर लिखा कि कम से कम विपिन पटेल में निर्णय लेने का साहस तो था, जबकि वह स्वयं पुरानी पेंशन प्रणाली के तहत पेंशन का हकदार होने के बावजूद 20 वर्षों की सेवा के बाद भी कोई बड़ा निर्णय नहीं ले पाए। इस टिप्पणी को कई अधिकारियों ने मौजूदा प्रशासनिक दबाव और असंतोष का प्रतीक माना है। अनूपपुर पोस्टिंग के बाद बढ़ा टकराव विभागीय सूत्रों के मुताबिक, विपिन पटेल को परेशान करने का सिलसिला अनूपपुर में डीएफओ पदस्थापना के बाद शुरू हुआ। उन्होंने नियमों के उल्लंघन के आधार पर विनियर मशीन लगाने की अनुमति निरस्त की थी। इस फैसले को लेकर तत्कालीन पीसीसीएफ संरक्षण और वर्तमान में कैम्पा एवं वर्किंग प्लान के प्रमुख मनोज अग्रवाल से मतभेद सामने आए। पूर्व पीसीसीएफ बिभाष ठाकुर ने भी माना कि वन अधिनियम और नियमों के तहत ऐसी अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद विवाद बढ़ता गया और प्रशासनिक दबाव का सिलसिला जारी रहा। एक और आईएफएस अधिकारी भी इस्तीफे की कगार पर सूत्रों का कहना है कि विभागीय प्रशासनिक अराजकता, ट्रांसफर-पोस्टिंग में भेदभाव और वर्किंग प्लान से जुड़ी अनदेखी से परेशान एक और आईएफएस अधिकारी भी सेवा से अलग होने का मन बना रही हैं। उज्जैन–शाजापुर वर्किंग प्लान का कार्य पूरा होने के बावजूद अंतिम सुनवाई नहीं होना और अन्य अधिकारियों को बिना प्रक्रिया पूरी किए सर्किल प्रभार मिलना, विभाग में बढ़ते असंतोष की ओर इशारा कर रहा है। जंगल महकमे में सामने आ रहे ये घटनाक्रम अब केवल एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि उन्होंने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।