ज़रा हटके
06-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आजकल मोबाइल की बढ़ती लत, काम का दबाव और भविष्य की चिंताओं ने लोगों को भीतर से थका दिया है। जिंदगी में तनाव, घबराहट, नींद न आना और मन का अशांत रहना आम समस्या बन चुकी है। ऐसे समय में आयुष मंत्रालय योग को मानसिक और शारीरिक संतुलन का प्रभावी साधन मानता है। योग की कई मुद्राओं में से काली मुद्रा को विशेष रूप से मन की शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मुद्रा माना गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, काली मुद्रा शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है और मानसिक बोझ को हल्का करने में मदद करती है। यह नकारात्मक सोच को कम करने, भय और बेचैनी से बाहर निकालने तथा आत्मबल को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। योग शास्त्र के मुताबिक, हमारे शरीर में ऊर्जा के प्रवाह के लिए नाड़ियां होती हैं, जिनमें सुषुम्ना नाड़ी सबसे महत्वपूर्ण है। यह नाड़ी रीढ़ की हड्डी के मध्य से गुजरती है और जब इसमें ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है, तो मन शांत और शरीर स्थिर रहता है। काली मुद्रा इसी ऊर्जा प्रवाह को सक्रिय और शुद्ध करने में मदद करती है। शारीरिक दृष्टि से काली मुद्रा सांस की प्रक्रिया को बेहतर बनाती है। इसके अभ्यास के दौरान गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़े मजबूत होते हैं और शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है। इससे थकान, जकड़न और लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली अकड़न में राहत मिलती है। रक्त संचार सुधरने से शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए काली मुद्रा का प्रभाव गहरा माना जाता है। यह दिमाग में छाए धुंधलेपन को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में सहायक है। पढ़ाई करने वाले बच्चों और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी यह मुद्रा लाभकारी मानी जाती है। नियमित अभ्यास से ध्यान लगाने में आसानी होती है और मन की उलझनें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। भावनात्मक स्तर पर काली मुद्रा डर, गुस्सा और बेचैनी जैसी नकारात्मक भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। इसके अभ्यास से व्यक्ति खुद को अधिक स्थिर, सुरक्षित और संतुलित महसूस करता है। काली मुद्रा का अभ्यास करना आसान है। इसे सुखासन में बैठकर या ताड़ासन में खड़े होकर किया जा सकता है। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर तर्जनी उंगलियों को ऊपर की ओर सीधा रखें। सांस धीरे-धीरे लें और छोड़ते समय नकारात्मक विचारों को मन से बाहर निकालने का भाव रखें। शुरुआत में दो से तीन मिनट का अभ्यास पर्याप्त है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। आध्यात्मिक रूप से इस मुद्रा को मूलाधार और मणिपुर चक्र से जोड़ा जाता है। मूलाधार चक्र सुरक्षा और स्थिरता देता है, जबकि मणिपुर चक्र आत्मविश्वास और साहस का केंद्र माना जाता है। इन चक्रों के सक्रिय होने से सकारात्मक सोच बढ़ती है। सुदामा/ईएमएस 06 फरवरी 2026