- हाईकोर्ट ने एक लाख मुआवजा देने के दिए आदेश - हाईकोर्ट ने माना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) की मनमानी कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक लाख रुपये की एक्सेम्प्लरी कॉस्ट लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह राशि सीधे याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा की जाए। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविन्द्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि सीजीएमएससी ने स्पष्टीकरण से जुड़ा अहम ई-मेल गलत और असंबंधित ई-मेल आईडी पर भेजकर याचिकाकर्ता को अवैध रूप से अयोग्य घोषित कर दिया। यह है मामला याचिकाकर्ता नटवर लाल अग्रवाल, रायगढ़ ने पत्थलगांव (जशपुर) स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोतबा के भवन एवं अस्पताल निर्माण के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये के टेंडर में सबसे कम और सरकार के लिए अधिक लाभकारी बोली प्रस्तुत की थी। इसके बावजूद उनकी वित्तीय बोली खोली ही नहीं गई और टेंडर अन्य निविदाकर्ता हितेन सूर्यवानी को दे दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर रायगढ़ में 100 बिस्तरों वाले अस्पताल का टेंडर पहले ही याचिकाकर्ता को दिया जा चुका है, उन्हीं दस्तावेजों को कोतबा परियोजना में सीजीएमएससी ने मनमाने ढंग से अस्वीकार कर दिया। परियोजना जनहित में जारी, लेकिन मनमानी पर मुआवजा सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सीजीएमएससी का यह आचरण संविधान के अनुच्छेद 14 का सीधा उल्लंघन है और सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत को पूरी तरह कुचलता है। हालांकि कोर्ट ने अस्पताल परियोजना को जनहित में जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सीजीएमएससी की मनमानी स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश पारित किया। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 07 फरवरी 2026