क्षेत्रीय
07-Feb-2026
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गुना (ईएमएस) सीमाएं भले ही देशों को बांटती हों, लेकिन मानवता की कोई सीमा नहीं होती। इसका जीवंत उदाहरण गुना में देखने को मिला, जहां रास्ता भटककर भारत आए एक नेपाली बुजुर्ग को समाजसेवी प्रमोद भार्गव के प्रयासों से सकुशल उनके वतन वापस भेज दिया गया। कई दिनों की भटकन और अनिश्चितता के बाद जब बुजुर्ग खुशीलाल मंडल को नेपाल दूतावास के प्रतिनिधियों के सुपुर्द किया गया, तो उनकी आंखों में घर वापसी की खुशी साफ झलक रही थी। साथियों से बिछड़कर गुना पहुंच गए थे खुशीलाल प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेपाल के सप्तरी जिले के निवासी खुशीलाल मंडल कुछ समय पूर्व अपने साथियों के साथ तीर्थाटन पर भारत आए थे। द्वारिकाधीश मंदिर के दर्शन के दौरान वे अपने समूह से बिछड़ गए और गलती से ट्रेन में बैठकर गुना आ पहुंचे। भाषा की समस्या और जानकारी के अभाव में वे कई दिनों तक जिले में यहां-वहां भटकते रहे। जब इस स्थिति की जानकारी समाजसेवी प्रमोद भार्गव को मिली, तो उन्होंने तत्काल बुजुर्ग को अपने संरक्षण में लिया। नेपाल गृह मंत्रालय से लेकर दुबई तक हुई पड़ताल प्रमोद भार्गव ने बुजुर्ग से आत्मीयता से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने खुद को नेपाल के ग्राम बनरझुला का निवासी बताया। इसके बाद श्री भार्गव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्कों की कड़ी जोड़ी। उन्होंने वहां के वार्ड अध्यक्ष से बात कर पहचान की पुष्टि कराई। पड़ताल में पता चला कि बुजुर्ग का बेटा दुबई में मजदूरी करता है और उनकी पत्नी अस्वस्थ होने के कारण उन्हें लेने आने में असमर्थ है। इस दौरान खुशीलाल को सुरक्षा और देखभाल के लिए गुना के आनंद धाम वृद्ध आश्रम में रखा गया और जिला प्रशासन को भी मामले से अवगत कराया गया। ससम्मान विदाई और दूतावास को सुपुर्दगी समाजसेवी प्रमोद भार्गव ने इस मानवीय संकट के समाधान हेतु नेपाल के गृह मंत्रालय के सचिव आनंद काप्ले से संपर्क साधा। नेपाल दूतावास के हस्तक्षेप के बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूर्ण की गई। नेपाल और भारत के बीच समन्वय करने वाली संस्था किन इंडिया के प्रतिनिधि प्रदीप कुमार सिंह विशेष रूप से गुना पहुंचे। सभी औपचारिकताओं के बाद प्रमोद भार्गव ने खुशीलाल मंडल का शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया और उन्हें नेपाली प्रशासन के सुपुर्द किया। इस भावुक विदाई के साथ बुजुर्ग अपने देश नेपाल के लिए रवाना हुए। क्षेत्र में प्रमोद भार्गव के इस संवेदशील और निस्वार्थ प्रयास की व्यापक सराहना की जा रही है।।सीताराम नाटानी