क्षेत्रीय
07-Feb-2026
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धमतरी(ईएमएस)। जिले में महानदी से हो रहे अंधाधुंध रेत खनन का असर अब साफ तौर पर पेयजल व्यवस्था पर दिखने लगा है। भूजल स्तर लगातार गिरने से गर्मी शुरू होने से पहले ही जिले में 76 हैंडपंप बंद हो चुके हैं। वहीं नवागांव-थूहा, चिंवरी और खुसरेंगा जैसे गांवों में नल-जल योजना पिछले तीन साल से ठप पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को भारी जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष जिले का औसत भूजल स्तर सामान्य 17.70 मीटर से घटकर लगभग 20.50 मीटर तक पहुंच गया था। मई-जून में यह स्तर करीब ढाई मीटर और नीचे चला गया, जिससे बड़ी संख्या में हैंडपंप और मोटर पंप बंद हो गए थे। वर्तमान में जिले के भूजल स्तर का ताजा डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन मार्च में सर्वे कर स्थिति स्पष्ट करने की योजना बताई जा रही है। जिले की 370 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 623 गांवों में पेयजल व्यवस्था के लिए —10,183 हैंडपंप,260 नल-जल योजनाएं,308 सोलर आधारित जल प्रदाय योजनाएं,690 सिंगल फेस पावर पंप संचालित हैं।इनमें से फिलहाल 76 हैंडपंप बंद हैं, जिनकी मरम्मत पीएचई विभाग द्वारा कराई जा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) गर्मी को देखते हुए एक कंट्रोल रूम स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। शिकायत मिलने पर तीन दिन के भीतर खराब हैंडपंप ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है। पीएचई के एसडीओ दीपक कनाड़े के अनुसार, गर्मी से पहले जल संकट से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। करेठा-कोलियारी, तेंदूकोना, अमेठी, परसुली, कलारतराई, दर्री, खरेंगा, जंवरगांव, अरौद, लीलर, भंवरमरा, सारंगपुरी, देवपुर, दोनर, बोरसी, भोथा, लड़ेड़ और चंदना-चंद्रसूर समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर रेत खनन हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे नदी तटों का प्राकृतिक जल संतुलन बिगड़ रहा है और आसपास के गांवों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)07 फरवरी 2026