08-Feb-2026
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कुआलालंपुर,(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया की दो दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू हुआ। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी और उनके मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम के बीच आयोजित प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया कि नई दिल्ली और कुआलालंपुर की समृद्धि एक-दूसरे की प्रगति में निहित है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में दो महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसियों के रूप में भारत और मलेशिया को अपनी पूरी क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता है। रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने एक अत्यंत मजबूत और स्पष्ट रुख अपनाया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत और मलेशिया अपने रक्षा सहयोग को और अधिक व्यापक बनाएंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में दोहरे मापदंड की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता। इसके साथ ही, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। प्रधानमंत्री इब्राहिम ने वैश्विक स्तर पर शांति प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता की सराहना की, विशेष रूप से यूक्रेन-रूस और मध्य पूर्व (गाजा) के संघर्षों के संदर्भ में भारत के संतुलित और शांतिपूर्ण दृष्टिकोण को सराहा। आर्थिक और तकनीकी भविष्य को ध्यान में रखते हुए, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्र अब हमारी साझेदारी की प्राथमिकता होंगे। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक संस्थानों में सुधार आज की अनिवार्य आवश्यकता है। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भारत की आर्थिक वृद्धि की प्रशंसा करते हुए कहा कि 1957 से चले आ रहे हमारे ऐतिहासिक संबंधों को व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी के माध्यम से एक नई मजबूती मिली है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत ने वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर शानदार प्रगति की है, जिससे पूरे क्षेत्र को प्रेरणा मिलती है। अंततः, प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि हमारी सभ्यताएं साझा सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी हुई हैं। यह यात्रा न केवल व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से सफल रही, बल्कि इसने दो सभ्यताओं के बीच के मानवीय संबंधों को भी एक नई ऊर्जा प्रदान की है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुआलालंपुर में मिले भव्य और गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हर संभव क्षेत्र में आपसी सहयोग का विस्तार करना है। उन्होंने मलेशिया में रह रहे लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोगों को दोनों देशों के बीच का जीवित पुल (लिविंग ब्रिज) करार दिया। प्रधानमंत्री ने आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए प्रधानमंत्री इब्राहिम को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि कुआलालंपुर के नेतृत्व में यह मंच और अधिक सशक्त होगा। वार्ता के दौरान यह रेखांकित किया गया कि भारत और मलेशिया का सहयोग अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि और विनिर्माण से लेकर स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, कौशल विकास और क्षमता निर्माण तक गहरा हो चुका है। वीरेंद्र/ईएमएस/08फरवरी2026