क्षेत्रीय
08-Feb-2026
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अपराध: नर्मदा विकास विभाग को लगाई चपत जबलपुर (ईएमएस)। पनागर पुलिस ने नर्मदा घाटी विकास विभाग के कार्यपालन यंत्री के प्रतिवेदन के आधार पर ठेकेदार और बैंक अधिकारी के खिलाफ 82 लाख की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है. आरोप है कि नर्मदा विकास विभाग के तहत कुण्ड वितरण नहर एवं इसके वितरण नहर प्रणाली का निर्माण कार्य की निविदा लेने वाले बैंगलोर के ठेकेदार और यूनियन बैंक सिविक सेंटर ब्रांच के अधिकारी ने मिलकर दोनों ने सांठगांठ करके बैंक में रखी एफडीआर चोरी-छिपे भुना ली। पुलिस प्रकरण को विवेचना में लेकर जांच कर रही है। पनागर पुलिस थाने से प्राप्त जानकारी के अनुसार नर्मदा घाटी विकास संभाग क्रमांक 02 के कार्यपालन यंत्री वीनेन्द्र कुमार भालाधरे ने एक प्रतिवेदन थाने में दिया जिसमें कहा गया है कि नर्मदा विकास अंतर्गत कुण्ड वितरण नहर एवं इसके वितरण नहर प्रणाली का निर्माण कार्य निविदा स्वीकृति 21 अक्टूबर 2004 के माध्यम से ठेकेदार मेसर्स कर्नाटका लेण्ड आर्मी बैंगलोर को दिया गया था, परंतु ठेकेदार द्वारा उक्त कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण नहीं किये जाने के कारण विभाग द्वारा विभाग एवं ठेकेदार के मध्य हुये अनुबंध को निरस्त किया गया। अनुबंध निरस्त किये जाने के विरोध में ठेकेदार द्वारा माध्यस्थ अभिकरण में अपील की गई। माध्यस्थम अभिकरण द्वारा पारित अधिनिर्णय दिनांक 07 सितम्बर 2022 के आदेशानुसार ठेकेदार की 43 लाख 75 हजार की दो बैंक गारंटी कुल 82 लाख की एफडी यूनियन बैंक सिविक सेंटर, मढ़ाताल से बैंक ड्राफ्ट बनाकर राजसात की गई। तत्पश्चात् ठेकेदार की जमा मूल एफ.डी. आर. नगदीकरण हेतु शाखा प्रबंधक, यूनियन बैंक मढ़ाताल को पत्र लिखा गया। यूनियन बैंक शाखा प्रबंधक द्वारा अपने पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि तकनीकी खराबी एवं पुरानी एफ.डी.आर. होने के कारण एकाउन्ट नंबर नहीं मिल रहा है जिसके कारण एफ.डी.आर. का नगदीकरण नहीं हो पा रहा है। एफ.डी. आर का नगदीकरण किये जाने हेतु पुनः शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक मढ़ाताल सिविक सेंटर को पत्र लिखा गया। शाखा प्रबंधक द्वारा अपने पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि उक्त एफ.डी. आर. का नगदीकरण वर्ष 2015 में हो चुका हैं। ठेकेदार के खाते में एफ.डीआर की राशियां अंतरित कर दी गई है। शाखा यूनियन बैंक द्वारा इस तरह अवैधानिक रूप से नियम विरूद्ध कृत्य किये जाने पर इस कार्यालय द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया कि मूल एफ.डी. आर. इस कार्यालय में जमा है फिर किस आधार पर एफ.डी. आर की राशि ठेकेदार के खाते में अंतरित कर दी गई। पुलिस ने समस्त अभिलेखों सहित मंगाये गये एवं जांच उपरांत पाया गया कि शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक मढ़ाताल सिविक सेंटर द्वारा कूटरचित ढंग से ठेकेदार को एफ.डी.आर. राशि का भुगतान करते हुये शासन को बहुत बड़ी हानि पहुंचाई गई है। जाँच पर प्रथम दृष्ट्या प्रोजेक्ट मैनेंजर के व्ही मलैश मेसर्स कर्नाटक लेण्ड आर्मी बैंगलोर (वर्तमान कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलेपमेंट लिमिटेड बैंगलोर) द्वारा तत्कालीन बैंक अधिकारी कार्पोरेशन बैंक शाखा जबलपुर (वर्तमान यूनियन बैंक शाखा मढाताल सिविक सेन्टर जबलपुर मय बिलय) के साथ मिलकर नर्मदा विकास विभाग के बिना जानकारी के ठेकेदार के व्ही मलैश द्वारा दो नग एफ डी आर जिसकी राशि क्रमश 44,83866, 3757048 रूपये की राशि नियम विरूद्ध नगदीकरण कर शासन एवं विभाग को कुल 82 लाख 40 हजार 914 रूपये का आहरण धोखाधड़ी पूर्वक किया गया. पुलिस ने धोखाधड़ी व अमानत में ख्यानत का मामला पाते हुये शाखा प्रबंधक व ठेकेदार के विरूद्ध धारा 420,406,409,34 भा.द.वि.का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। सुनील साहू / शहबाज / 08 फरवरी 2026