परिवार का आरोप- समय पर सही इलाज नहीं मिलने से जान गई ढाका(ईएमएस)। बांग्लादेश की जेलों में बंद कैदियों के साथ व्यवहार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अवामी लीग के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सांसद रहे रमेश चंद्र सेन (86) की शनिवार रात न्यायिक हिरासत में मौत हो गई। वह करीब 18 महीने से जेल में थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। परिवार का आरोप है कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्हें पर्याप्त इलाज नहीं मिला और बार-बार स्वास्थ्य आधार पर जमानत की मांग खारिज की जाती रही। अधिकारियों ने मौत की वजह बीमारी बताई है। रमेश चंद्र सेन की तबीयत जेल में रहते हुए लगातार बिगड़ती गई। परिजनों के मुताबिक, उन्हें कई बीमारियां थीं और नियमित चिकित्सा देखभाल की जरूरत थी। परिवार का कहना है कि उन्हें नाजुक हालत के बावजूद हिरासत में रखा गया। परिवार के एक सदस्य ने कहा कि उन्हें न तो सही इलाज मिला और न ही सम्मान। उनसे बुनियादी मानवाधिकार तक छीन लिए गए। शनिवार रात हिरासत में ही उनकी मौत हो गई। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 2025 से अब तक बांग्लादेश में हिरासत के दौरान कम से कम 107 लोगों की मौत हुई है। इनमें ज्यादातर अवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। लगभग हर मामले में मौत की वजह दिल का दौरा या अचानक बीमारी बताई गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन मामलों में स्वतंत्र जांच नहीं होती। एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि हिरासत में मौत को अपराध की आशंका के तौर पर नहीं, सिर्फ कागजी कार्रवाई मान लिया जाता है। बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 31 और 32 के तहत हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति के जीवन और गरिमा की जिम्मेदारी राज्य की होती है। इससे पहले 11 जनवरी को अवामी लीग के पूर्व नेता और हिंदू कलाकार प्रलय चाकी की भी इलाज के दौरान हिरासत में मौत हो गई थी। उनके परिजनों ने भी समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगाया था, लेकिन उस मामले में भी कोई बड़ी जवाबदेही तय नहीं हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जुलाई आंदोलन के बाद अवामी लीग के 200 से ज्यादा वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी फिलहाल जेल में हैं। विनोद उपाध्याय / 08 फरवरी, 2026