राज्य
09-Feb-2026


* बाल संरक्षण आयोग की पहल, ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों पर फैलाई जाएगी जागरूकता गांधीनगर (ईएमएस)| बाल विवाह जैसे सामाजिक कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से आज गांधीनगर से बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठाबेन गज्जर ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत विशेष जनजागृति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ राज्य के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में नागरिकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देगा। इस अवसर पर धर्मिष्ठाबेन गज्जर ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं है, बल्कि यह बच्चे के मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक विकास में एक बड़ा अवरोध है। इस अभियान के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक यह संदेश पहुँचाना हमारा उद्देश्य है कि विवाह की निर्धारित आयु सीमा का पालन करना केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। समाज जागरूक होगा तभी ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ का सपना साकार हो सकेगा। समाज सुरक्षा विभाग के निदेशक विक्रमसिंह जादव ने बताया कि बाल विवाह कराने वाले तथा उसमें सहभागी बनने वाले सभी नागरिक दंड के पात्र हैं। देश की नन्ही बालिकाओं को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा से बचाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि यह जनजागृति रथ गांधीनगर, मेहसाणा, पाटण, साबरकांठा, अरवल्ली और महिसागर जिलों में नागरिकों को बाल विवाह के नुकसान के बारे में जानकारी देगा। यह रथ पर्चों एवं ऑडियो संदेशों के माध्यम से अभिभावकों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के बारे में जागरूक करेगा। कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक शपथ भी दिलाई गई तथा नागरिकों से अपील की गई कि यदि कहीं भी बाल विवाह हो रहा हो या इसकी जानकारी मिले, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1098 या 112, स्थानीय पुलिस अथवा प्रशासन से संपर्क करें। इस अवसर पर ज़ोनल कोऑर्डिनेटर जयेश परमार, समाज सुरक्षा विभाग के उप निदेशक एच. एन. वाला, गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेंद्र पंड्या सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सतीश/09 फरवरी