राज्य
09-Feb-2026


- वर्तमान सत्र में प्रदेशभर में 100 विद्यार्थियों ने ही लिया है प्रवेश भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश में प्रोफेशनल कोर्सों की पढ़ाई हिंदी में शुरू की गई है। सबसे पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में शुरू की गई थी। लेकिन हिंदी में इंजीनियरिंग पढऩे में छात्रों की दिलचस्पी नहीं है। आलम यह है कि प्रदेश में इंजीनियरिंग कालेजों में हर साल हिंदी मीडियम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए 224 सीटें सुरक्षित रखी जाती हैं, लेकिन वे कभी भी भर्ती नहीं हैं। वर्तमान सत्र में प्रदेशभर में हिंद माध्यम से इंजीनियरिंग करने के लिए 100 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। सरकार ने 2022 में जब हिंदी में अभियांत्रिकी की पढ़ाई शुरू कराई थी, तब पहले वर्ष केवल 19 प्रवेश हुए थे। 2023 में तीन कालेजों ने कम्प्यूटर साइंस और एक कालेज ने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में 90 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया था। इसी तरह गत सत्र 2024-25 में चारों कालेजों में 104 विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम से पढऩे का विकल्प चुना था। वर्तमान सत्र में बामुश्किल प्रवेश का आंकड़ा सैकड़ा तक पहुंचा है। प्रदेश में केवल चार अभियांत्रिकी संस्थाओं में यह पढ़ाई हो रही है। हालांकि कठिनाइयों के बाद भी प्रवेश के रुझान सकारात्मक हैं, लेकिन मुकाम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। चार साल में 300 प्रवेश भी नहीं हो पाए मप्र में हिंदी को तकनीकी शिक्षा में जगह बनाने के सरकार ने जो प्रयास शुरू किए हैं वह व्यवस्था इसलिए फेल हो रही है क्योंकि हिंदी से इंजीनियरिंग कराने में न कालेज आगे आ रहे और न इसमें विद्यार्थी रुचि ले रहे हैं। प्रदेश के अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में हिंदी माध्यम से पढ़ाई के लिए हर साल 224 सीटें रिवर्ज जाती हैं, लेकिन चार साल में 300 प्रवेश भी नहीं हो पाए हैं। वर्तमान सत्र में प्रदेशभर में हिंद माध्यम से इंजीनियरिंग करने के लिए 100 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। जबकि गत वर्ष 104 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। गत वर्ष की अपेक्षा चार सीटों पर कम प्रवेश हुए हैं। हिंदी से इंजीनियरिंग करने में काफी समस्याएं दरअसल, विद्यार्थियों को हिंदी से इंजीनियरिंग करने में काफी समस्याएं हैं। इसके बाद प्लेसमेंट में भी परेशानी होती है। हालांकि वर्तमान सत्र इंजीनियरिंग का बैच तैयार हो जाएगा। उक्त चारों कालेज विद्यार्थियों को डिग्री देकर प्लेसमेंट की व्यवस्था जुटाने में अभी से लग गए हैं। इंदौर स्थित एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड रिसर्च में कंप्यूटर विज्ञान और अभियांत्रिकी का पाठ्यक्रम हिंदी में शुरू किया गया है। यहां 75 सीटों की सभी सीटों के साथ तीन अतिरिक्त सीटो समेत 78 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। तकनीकी पढ़ाई हिंदी में कराने में अभी कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि ने अब तक हिंदी में पाठ्यक्रम शुरू नहीं किया है। अभियांत्रिकी महाविद्यालयों के प्राध्यापकों का कहना है कि हिंदी पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले कई स्तर पर तैयारियां की जानी थीं, जो नहीं की गई। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा संस्थान की ओर से अभियांत्रिकी की पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि को दायित्व सौंपा है। इसमें 81 पुस्तकें अनुवादित कर देनी थीं, लेकिन यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान में कार्य चलन में बना हुआ है। उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार मध्य प्रदेश में अभियांत्रिकी की पढ़ाई हिंदी में कराने की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। इसे पढ़ाने वाले शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए उन्हें भी प्रेरित किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी को पूरा कर रहें हैं। पुस्तकें भी तैयार कर रहे हैं। विनोद / 09 फरवरी 26