श्योपुर ( ईएमएस ) | कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने कहा कि 18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के युवाओं के लिए ड्रायविंग लाइसेंस बनाये जाने के लिए सभी कॉलेजों में शिविर लगाये जायें। इसके लिए परिवहन विभाग, लीड कॉलेज प्राचार्य से समन्वय कर शिविर आयोजन की तिथियां सुनिश्चित करें। वे आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय सीमा की बैठक के दौरान अधिकारियों को दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे थे। बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री सौम्या आनंद, अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय, एसडीएम गगन सिंह मीणा, डिप्टी कलेक्टर विजय शाक्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में नॉन अटेंडेन्ट शिकायतों के मामले में कडी कार्यवाही की जायेगी, इसलिए सभी अधिकारी शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल अटेंन्ड करें एवं शिकायतों का सकारात्मक तथा संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करें। ऐसे अधिकारी जो टीएल मार्क पत्रों एवं शिकायतों के निराकरण और प्रतिवेदन भेजने में उदासीनता बरतते है, उन्हें समक्ष में बुलाकर प्रतिवेदन प्राप्त किया जायें तथा प्रतिदिन निराकरण की समीक्षा की जायें। उन्होंने वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त पत्रों का उत्तर समय पर भेजने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। इसी प्रकार विधानसभा प्रश्नो के जवाब त्वरित भेजे जाने हेतु निर्देशित किया गया। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने एलडीएम को निर्देश दिये कि पीएम जीवन ज्योति योजना, पीएम जीवन सुरक्षा योजना एवं अटल पेंशन योजना अंतर्गत हितग्राहियों का पंजीयन करने के लिए शिविर आयोजित किये जायें। मंडी शुल्क बढाने मॉनीटरिंग के निर्देश कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने एसडीएम तथा भार साधक अधिकारी कृषि उपज मंडी श्योपुर श्री गगन सिंह मीणा को निर्देश दिये कि मंडी शुल्क बढाने के लिए नियमित रूप से मॉनीटरिंग की जायें तथा कृषि उपज मंडी में कार्यरत राजस्व निरीक्षको एवं सहायक राजस्व निरीक्षको के कार्य की समीक्षा की जायें। उन्होंने कहा कि कृषि उपज मंडी से उपज लेकर निकलने वाले वाहनों की चैकिंग की जायें। इसी प्रकार गोदामों में रखी उपज की जानकारी भी प्राप्त की जायें। मंडी में खरीदी गई उपज की निकासी के संबंध में नियमानुसार शुल्क प्राप्ती सुनिश्चित की जायें। उन्होंने नगरीय निकायों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि भवन निर्माण कराने वालों को विकास अनुज्ञा प्राप्त करने के बाद ही कंस्ट्रक्शन कराने के लिए प्रेरित किया जायें तथा निर्माण की अनुज्ञा नियमानुसार सतत् रूप से प्रदाय की जायें।