राज्य
09-Feb-2026


-- राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी को प्रशासन रास्ते में ही रोकते हुए हाथरस (ईएमएस)। प्रशासन द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद अपने घर के बाहर सड़क पर अनशन कर रहे राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरैया से मिलने जा रहे राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी को प्रशासन ने रास्ते में ही रोक लिया। चतुर्वेदी ने प्रशासन से मुलाकात की अनुमति के लिए बार-बार आग्रह किया, लेकिन यह कहकर वापस कर दिया गया कि जिलाधिकारी की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति पंकज धवरैया से नहीं मिल सकता। पंकज धवरैया यूजीसी एक्ट के विरोध में सनातन स्वाभिमान यात्रा पर जाते समय हाउस अरेस्ट किए गए थे। बीते तीन दिनों से वह अपने घर के बाहर अनशन पर बैठे हैं। प्रशासन द्वारा उनके घर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और किसी को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सोमवार को मित्रेश चतुर्वेदी ने पंकज धवरैया से मिलने की घोषणा की थी। जब वह हाथरस पहुंचे तो पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था। प्रशासन ने उनकी गाड़ी को रास्ते में ही रोक दिया। काफी देर तक नोकझोंक के बाद उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। इस दौरान चतुर्वेदी ने मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। मित्रेश चतुर्वेदी ने कहा कि यूजीसी एक्ट के माध्यम से सवर्ण समाज के हितों पर कुठाराघात किया गया है। सनातन स्वाभिमान यात्रा सवर्ण समाज की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन प्रशासन ने यात्रा संयोजक पंकज धवरैया को असंवैधानिक तरीके से बंधक बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कड़ाके की ठंड में खुले में अनशन कर रहे धवरैया के जीवन और स्वास्थ्य को खतरा है। उन्होंने कहा कि जेल में भी मिलने का समय दिया जाता है, लेकिन यहां शांति व्यवस्था के नाम पर एक अकेले व्यक्ति को मिलने से रोका जा रहा है। प्रशासन लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर उत्पीड़न किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसी क्रम में परशुराम दल के प्रदेश अध्यक्ष सतेंद्र लवानिया अपनी टीम के साथ तथा आगरा सवर्ण आर्मी, हाथरस बार एसोसिएशन के अधिवक्ता और अन्य संगठनों के पदाधिकारी भी पंकज धवरैया से मिलने पहुंचे, लेकिन सभी को प्रशासन ने रोक दिया। लौटते समय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर तानाशाही और दमनात्मक रवैये के आरोप लगाए। ईएमएस/ नीरज चक्रपाणी/ 09 फरवरी 2026