इन्दौर (ईएमएस) भागीरथपुरा में नगर निगम द्वारा सप्लाई दूषित पानी के कारण दो और लोगों की मौत के बाद वहां मौतों का बाद आंकाड़ा 35 हो गया है। भागीरथपुरा में दूषित पानी से पिछले 24 घंटों में हुई दो और मौतों में 75 वर्षीय बुजुर्ग शालिग्राम ठाकुर की कल रात मौत हुई वहीं दो साल की मासूम बच्ची रिया की आज सुबह मौत हुई। और इसके साथ ही वहां मौतों का आंकड़ा 35 पर पहुंच गया। शालिग्राम ठाकुर उम्र पचहत्तर वर्ष की मृत्यु कल रात हुईं वे क्षेत्र के उन बुजुर्ग निवासियों में से थे जो लंबे समय से दूषित पानी के कारण बीमार थे उन्हें 2 जनवरी को पहले शैल्बी फिर वहां से बाम्बे हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहीं दो साल की मासूम बच्ची रिया जिसकी मृत्यु आज मंगलवार को सुबह हुई। वह भी भागीरथपुरा में फैले दूषित पानी (Infected Water) के कारण होने वाले उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की चपेट में थी। रिया की मौत इस पूरी घटना की सबसे दुखद कड़ियों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि वह इस त्रासदी के सबसे कम उम्र के पीड़ितों में से एक है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों पर दूषित पानी का असर सबसे घातक रहा है। इन ताजा मौतों ने क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ गुस्से को और बढ़ा दिया है। कितने शर्म की बात है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय एक भीषण स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। पीने के पानी में सीवेज के मिलन (Contamination) से फैली बीमारियों ने अब तक 35 लोगों की जान ले ली है। जांच में सामने आया है कि नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण पास के शौचालय का गंदा पानी (सीवेज) आपूर्ति में मिल गया था। इसके परिणामस्वरूप दिसंबर 2025 के अंत से पूरे क्षेत्र में उल्टी और दस्त (डायरिया) का प्रकोप फैल गया था। जिसके कारण हजारों लोग बीमार हो गए थे और उनमें से 35 की मौत हो गई। हालांकि यहां हुई मौतों की संख्या को लेकर प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच गहरा मतभेद है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब तक 35 लोग जान गंवा चुके हैं वहीं आधिकारिक तौर पर स्वास्थ्य विभाग ने डेथ ऑडिट रिपोर्ट में केवल 16 मौतों को सीधे तौर पर दूषित पानी से जोड़ा है। अन्य मौतों को पुरानी बीमारियों या अन्य कारणों से बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्ट को आई-वॉश (दिखावा) करार देते हुए इस मामले की गहन जांच के लिए जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर पीड़ितों और गवाहों से 28 फरवरी तक सबूत और दस्तावेज मांगे हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले इंदौर नगर निगम के कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है, हालांकि छोटी गलियों में पानी की उपलब्धता अब भी एक चुनौती बनी हुई है। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर घर तक सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 नियत की गई है। आनंद पुरोहित/ 10 फरवरी 2026