11 फ़रवरी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि पर विशेष) भारत को अगर विश्व गुरु बनाना है तो उसका आधार केवल भारत का ही चिंतन हो सकता है , पश्चिम के आधार पर चलकर हम केवल पश्चिमी देशों के पिछलग्गू तो बन सकते हैं हम दुनिया का नेतृत्व नहीं कर सकते,भारत को अपने स्व को पहचानकर आगे बढ़ना होगा। यह चिंतन आधुनिक भारत के समस्त मनीषियों का रहा है इस चिंतन को एकात्म मानव दर्शन के रूप में प्रतिपादित करने वाले थे भारतीय जनसंघ के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री पंडित दीनदयाल उपाध्याय। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिन्होंने भारत के स्व को पहचानकर भारतीयता के आधार पर भारत के स्वर्णिम भविष्य का स्वप्न देखा जिन्होंने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की भी चिंता की और कहा बिना समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उद्धार हुए राष्ट्र का अपने बल पर खड़ा होना मुश्किल है अंत्योदय से ही राष्ट्रोदय संभव है का मंत्र देने वाले आज की भारतीय जनता पार्टी के प्रेरणापुंज और जनसंघ के आधार स्तंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को नियति ने 11 फ़रवरी 1968 को देश से छीन लिया पर उनके बताए मार्ग पर चलकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की केन्द्र सरकार एवं देश के 19 राज्यों की भाजपा एवं भाजपा गंठबंधन की सरकारें दीनदयाल जी के स्वप्न को साकार कर रही हैं।। एकात्म मानव दर्शन का मूल उद्देश्य मनुष्य को केवल आर्थिक प्राणी न मानकर उसे शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का समन्वित रूप मानना है। यह दर्शन भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों पर आधारित है। वर्तमान समय में यदि भारत की राजनीति में इस दर्शन की व्यावहारिक अभिव्यक्ति देखी जाए, तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में इसके तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। एकात्म मानव दर्शन का आधार यह है कि समाज, राष्ट्र और व्यक्ति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि एक अखंड इकाई के रूप में जुड़े हुए हैं। यह दर्शन पश्चिमी विचारधाराओ पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों से भिन्न है। जहाँ पूंजीवाद व्यक्ति को केंद्र में रखता है और साम्यवाद राज्य को, वहीं एकात्म मानव दर्शन समाज और संस्कृति को केंद्र में रखता है। इस दर्शन के अनुसार विकास केवल भौतिक नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक भी होना चाहिए। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचाना ही इसका उद्देश्य है, जिसे “अंत्योदय” कहा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने शासन को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का साधन माना है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का नारा एकात्म मानव दर्शन की भावना को ही प्रतिबिंबित करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार की योजनाएँ एकात्म मानव दर्शन की अंत्योदय अवधारणा को साकार करती हैं। प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा। प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) में अब तक कुल लाभार्थी संख्या लगभग 57.11 करोड़ लोगों तक पहुंच चुकी है। जिनमें देश भर के नागरिक शामिल हैं और ये संख्या लगातार बढ़ रही है इन खातेधारकों में ग्रामीण और शहरी दोनों शामिल हैं, तथा इन खातों के माध्यम से लाभार्थियों को बैंकिंग, डेबिट कार्ड, बीमा, पेंशन तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसे कई लाभ दिए जाते हैं। इन खातों के खुलने के बाद सरकार की योजनाओं से मिलने मिलने वाली राशि सीधे हितग्राहियों को प्राप्त हो रही है और बिचौलियों से जनता को राहत मिली है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन मिला। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से लगभग 10.33 करोड़ परिवार देश भर में उज्ज्वला योजना का लाभ उठा रहे हैं।प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) से लाभ पाने वाले परिवारों में पहली एलपीजी कनेक्शन के साथ गैस चूल्हा भी प्रदान किया जाता है, जिससे घरेलू स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat – Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana) भारत की flagship स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को कैशलेस और मानक उपचार प्रदान करना है। अब तक लगभग 40.45 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो लगभग 14.69 करोड़ परिवारों को कवर करते हैं। देश भर के गरीब परिवारों तक स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा पहुँच चुकी है, जिससे वे 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज कैशलेस तौर पर अस्पतालों में प्राप्त कर सकते हैं। पूरे देश में 30,000 से अधिक अस्पताल (सरकारी + निजी) योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं, ताकि लाभार्थी आसानी से इलाज करवा सकें। ये योजनाएँ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता का भाव भी उत्पन्न करती हैं, जो एकात्म मानव दर्शन का मूल तत्व है। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी चिंतन। एकात्म मानव दर्शन स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल देता है। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत आत्मनिर्भर भारत अभियान इसी सोच का आधुनिक रूप है। इसका उद्देश्य भारत को आर्थिक,तकनीकी और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान—“वोकल फॉर लोकल”—भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक स्वाभिमान को भी सुदृढ़ करता है आत्मनिर्भर भारत अभियान भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसकी शुरुआत मई 2020 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। इसका उद्देश्य भारत को आर्थिक, औद्योगिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि देश अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर न रहे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत भूमिका निभा सके। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ आत्मकेंद्रित होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता को मजबूत करते हुए दुनिया से जुड़ा हुआ भारत बनाना है। इसका नारा है— “लोकल को ग्लोबल बनाना” और “वोकल फॉर लोकल”। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अभियान को पाँच आधार स्तंभों पर रखा:अर्थव्यवस्था (Economy) – आधुनिक, मजबूत और नवाचार-आधारित , अवसंरचना (Infrastructure) – विकास की पहचान ,प्रणाली (System) – तकनीक आधारित, पारदर्शी व्यवस्था,जनसांख्यिकी (Demography) – युवा और कुशल मानव संसाधन, मांग (Demand) – घरेलू मांग को सशक्त करना। इसके लिए प्रमुख क्षेत्र MSME सेक्टर को सशक्त करने के लिए ऋण सुविधा, गारंटी योजना और सुधार,मेक इन इंडिया और PLI (Production Linked Incentive) योजनाओं के जरिए विनिर्माण को बढ़ावा कृषि सुधार और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास,डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और नवाचार को प्रोत्साहन,रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता में कमी,स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मसम्मान और स्वाभिमान से भी जुड़ा है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, आयात घटता है और देश की अर्थव्यवस्था अधिक सुदृढ़ होती है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भारत को समावेशी, टिकाऊ और आत्मविश्वासी राष्ट्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र—तीनों का संतुलित विकास लक्ष्य है। पर्यावरण और संतुलित विकास एकात्म मानव दर्शन प्रकृति और मानव के बीच संतुलन पर बल देता है। मोदी सरकार की नीतियों में यह दृष्टिकोण स्पष्ट दिखता है। केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को ₹3,759.46 करोड़ का बजट मिला है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 8% की वृद्धि दर्शाता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटन ,प्रदूषण नियंत्रण (जैसे वायु और जल प्रदूषण से निपटने वाली योजनाओं) के लिए ₹1,091 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वायु गुणवत्ता और अन्य पर्यावरण कार्यक्रम साथ ही साथ स्वच्छ भारत अभियान जो केवल स्वच्छता नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है जिसने भारत के जन जन के मन में स्वच्छ भारत के साथ स्वास्थ्य भारत का भी भाव जगाया है। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा प्रारंभ की गई नमामि गंगे परियोजना भी पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उदाहरण है। नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा पर जोर देना प्रकृति के साथ सहअस्तित्व की भावना को दर्शाता है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय मूल्य एकात्म मानव दर्शन भारतीय संस्कृति को राष्ट्र की आत्मा मानता है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण पर विशेष ध्यान दिया है। नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल ( में भारत के प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास/पुनर्निर्माण इन परियोजनाओं में मंदिरों की पुरानी संरचनाओं की बहाली, परिसर का विस्तारीकरण, सुधार, एवं पर्यटन-आस्था केंद्र के रूप में विकास शामिल है—जो सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ भक्तों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं। केदारनाथ मंदिर को 2013 के आपदा के बाद व्यापक पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों के तहत विकसित किया गया है। आसपास के ढांचे को मजबूत किया गया, बाढ़-प्रतिरोधी दीवारें बनाई गईं।यात्री सुविधा के लिए बेहतर मार्ग, केबल कार आदि का निर्माण हुआ। यहां आदि शंकराचार्य समाधि स्थल का पुनर्निर्माण भी किया गया। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) यह परियोजना सीधा काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर से गंगा नदी तक का मार्ग जोड़ती है। प्रभु केरी (temple precinct) का विस्तार हुआ। महाकाल लोक कॉरिडोर (उज्जैन, मध्य प्रदेश) भव्य कॉरिडोर परियोजना के तहत महाकालेश्वर मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार और विस्तारीकरण कार्य पूरा किया गया। यह पुरातात्विक संरचनाओं और मंदिर प्रांगण का संरक्षण-विकास भी सुनिश्चित करता है। त्रिपुरा सुंदरि मंदिर (Tripura Sundari, त्रिपुरा) लगभग 524 वर्ष पुराने प्राचीन मंदिर का पुनर्विकास प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं उद्घाटित किया पर्यटन और आस्था दोनों दृष्टियों से इसे संवारा गया। सोमनाथ मंदिर (गुजरात) सोमनाथ मंदिर के आसपास समुद्र तट पर प्रॉमनेड, प्रदर्शनी केंद्र और मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार/विकास कार्य हुआ। विश्व उमियाधाम (गुजरात) के विशाल मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार की आधारशिला भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा रखी रखी गई है जो बाद में देश का बड़ा धर्म-आस्था केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जीर्णोद्धार व संवर्धन को उच्च प्राथमिकता दी है, जो आस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत दोनों को सुदृढ़ करते हैं। इन परियोजनाओं से न केवल मंदिर संरचनाओं को संरक्षित किया गया है, बल्कि भक्तों के लिए सुविधाओं, सुरक्षा और सुगम यात्रा का भी बेहतर प्रबंध सुनिश्चित किया गया है। योग को वैश्विक पहचान, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, राम मंदिर निर्माण, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020—ये सभी प्रयास भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और समग्र विकास पर दिया गया बल एकात्म मानव दर्शन से प्रेरित ही है। सुशासन और नैतिक राजनीति पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राजनीति को नैतिकता से जुड़ा कर्म माना था। मोदी सरकार द्वारा “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की अवधारणा इसी सोच को दर्शाती है। “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” नरेन्द्र मोदी सरकार का एक प्रमुख शासन दर्शन (Governance Philosophy) है। न्यूनतम सरकार इसका अर्थ है— सरकार का अनावश्यक हस्तक्षेप कम हो ,लेकिन शासन की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और जवाबदेही अधिक हो। इस विचार का मूल उद्देश्य है कि सरकार नियंत्रक नहीं, बल्कि सुविधादाता (Facilitator) की भूमिका निभाए। जनता के जीवन में सरकार की उपस्थिति कम दिखे, लेकिन जहाँ ज़रूरत हो वहाँ शासन तेज़, पारदर्शी और प्रभावी हो। अनावश्यक कानूनों और जटिल प्रक्रियाओं को हटाना लाइसेंस-परमिट राज में कमी लालफीताशाही और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण सरकारी दखल कम करके निजी और सामाजिक पहल को बढ़ावा अधिकतम शासन (Maximum Governance) बेहतर नीति निर्माण और तेज़ क्रियान्वयन,पारदर्शिता और जवाबदेही,तकनीक आधारित शासन (ई-गवर्नेंस),नागरिक सेवाओं की आसान और समयबद्ध उपलब्धता हैं इस अवधारणा के प्रमुख उदाहरण डिजिटल इंडिया ऑनलाइन सेवाएँ, डिजिलॉकर, UMANG ऐप ,सरकारी सेवाओं में कागज़ी कार्यवाही कम इससे आम नागरिक का समय और पैसा दोनों बचा। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रही है इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है तथा पारदर्शिता बड़ी है और भ्रष्टाचार में कमी हुई है। अनावश्यक कानूनों का उन्मूलन हजारों पुराने और अप्रासंगिक कानून समाप्त होने से व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business) हुई है ,न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप, अधिकतम तकनीक ,फेसलेस टैक्सेशन,ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली,ई-ऑफिस और पेपरलेस गवर्नेंस ,न्यूनतम मंत्रालय, स्पष्ट जिम्मेदारी से मंत्रालयों के कामकाज में तालमेल बढ़ा है एवं निर्णय प्रक्रिया में गति आई है। एकात्म मानव दर्शन में शासन का उद्देश्य व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का समग्र विकास है। सरकार का काम लोगों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना है। “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” केवल नारा नहीं, बल्कि शासन की कार्यपद्धति में परिवर्तन है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने इसे तकनीक, सुधार और पारदर्शिता के माध्यम से लागू करने का प्रयास किया है। डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता पर जोर देकर सरकार ने शासन को अधिक जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों में एकात्म मानव दर्शन की स्पष्ट झलक मिलती है। चाहे वह अंत्योदय हो, आत्मनिर्भरता हो, सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो या संतुलित विकास—इन सभी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की छाया दिखाई देती है। आज के वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद के दौर में एकात्म मानव दर्शन भारत को उसकी जड़ों से जोड़ते हुए एक मानवीय, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करता है। नरेन्द्र मोदी सरकार इस दर्शन को व्यवहार में उतारने का प्रयास कर रही है, जो भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है।। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी आज हमारे बीच नहीं है पर उनके बताए मार्ग पर चलकर एकात्म मानव दर्शन के सिद्धांत और अंत्योदय से राष्ट्रोदय के संकल्प का आज आज हम साकार होता हुआ देख रहे हैं।। (प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा मध्यप्रदेश संभाग प्रभारी भाजपा निमाड़ संभाग) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 10 फरवरी /2026