मुंबई (ईएमएस)। बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी स्टारर अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ अपने नाम के चलते विरोध के केंद्र में आ गई है। इस फिल्म के शीर्षक को लेकर विवाद गहरा गया है। नीरज पांडे द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कहानी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी पर आधारित है, जिसे लोग ‘घूसखोर पंडित’ के नाम से जानते हैं। इसी नाम को लेकर सोशल मीडिया और कई संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शीर्षक किसी विशेष जाति को निशाना बनाता है, इसलिए इसे बदलना चाहिए। यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी फिल्म के नाम या थीम को लेकर इतना विवाद उठ खड़ा हुआ है। बॉलीवुड में कई बड़ी फिल्मों को विरोध, कानूनी नोटिस और सेंसरशिप की मांगों के चलते अपना टाइटल बदलना पड़ा है। हाल के वर्षों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। साल 2023 में रिलीज हुई कार्तिक आर्यन और कियारा आडवाणी स्टारर फिल्म ‘सत्यप्रेम की कथा’ का मूल नाम ‘सत्यनारायण की कथा’ था। धार्मिक भावनाएं आहत होने के आरोप लगने के बाद मेकर्स ने नाम बदलना पड़ा। इसी तरह 2020 में अक्षय कुमार की फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ को भी केवल ‘लक्ष्मी’ करना पड़ा, जब देवी लक्ष्मी के नाम के साथ ‘बॉम्ब’ शब्द जोड़ने पर आपत्ति जताई गई और राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। अजय देवगन की फिल्म ‘थैंक गॉड’ भी विवादों से अछूती नहीं रही। फिल्म में अजय का किरदार चित्रगुप्त से प्रेरित था, लेकिन देवता का मजाक उड़ाने के आरोप में विरोध बढ़ा तो टीम ने नाम बदलकर किरदार को केवल ‘सीजी’ कर दिया। इसी तरह सलमान खान प्रोड्यूस्ड फिल्म ‘लवरात्रि’ को भी नवरात्रि से मिलते-जुलते नाम पर उठे विवाद के बाद ‘लवयात्री’ करना पड़ा। संजय लीला भंसाली की चर्चित फिल्म ‘पद्मावती’ 2018 में उग्र विरोध के बाद ‘पद्मावत’ बनकर रिलीज हुई। करणी सेना ने ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ और रानी पद्मावती के चरित्र के गलत चित्रण का आरोप लगाया था। नाम बदलने के साथ कुछ दृश्यों को भी हटाया गया। भंसाली की ही एक और फिल्म ‘रामलीला’ को अपने मूल नाम पर विरोध झेलना पड़ा, जिसके बाद इसे ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’ के नाम से दर्शकों तक पहुंचाया गया। सुदामा/ईएमएस 11 फरवरी 2026