राष्ट्रीय
11-Feb-2026
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गांधी से पहले किसकी तस्वीर होती थी नोट पर नई दिल्ली (ईएमएस)। हर दिन हमारे हाथों से गुजरने वाले नोटों पर छपी महात्मा गांधी की तस्वीर को देखकर सवाल उठता हैं कि ये चेहरा नोटों पर हमेशा से था, इससे पहले कोई और भी नोटों पर था। दरअसल, भारतीय नोटों की कहानी में चेहरे बदले हैं, फैसले बदले हैं और इस बदलाव के पीछे देश की सोच और पहचान छिपी रही है। भारत में कागजी मुद्रा की शुरुआत औपनिवेशिक दौर में हुई। उस समय नोट केवल लेन-देन का जरिया नहीं थे, बल्कि सत्ता का प्रतीक भी माने जाते थे, इसलिए ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय नोटों पर अंग्रेज शासकों की तस्वीरें छापी जाती थीं। ब्रिटिश राज में जारी होने वाले भारतीय नोटों पर सबसे पहले किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी। उनके बाद किंग जॉर्ज षष्ठम के चित्र वाले नोट प्रचलन में आ गए। ये नोट ब्रिटेन में छपते थे और इन्हें भारत में चलन के लिए भेजा जाता था। इन नोटों पर अंग्रेजी राजशाही की स्पष्ट छाप दिखती थी, जो उस दौर की राजनीतिक हकीकत को दिखाती थी। आजादी के बाद बड़ा फैसला 1947 में आजादी मिलने के बाद भारत सरकार के सामने एक अहम सवाल था कि क्या नए भारत की करेंसी पर भी किसी व्यक्ति की तस्वीर होनी चाहिए? तब तय किया गया कि नोटों पर किसी व्यक्ति की तस्वीर नहीं होगी। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि नई भारतीय पहचान किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की भावना से जुड़े। इस वजह से भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटों पर अशोक स्तंभ के सिंह चिह्न को प्रमुखता दी। साथ ही खेती, उद्योग, विज्ञान और विकास से जुड़े चित्रों को नोटों की पहचान बनाया गया। लेकिन इसके कई सालों बाद महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में नोटों पर दिखाई दी। यह मौका था उनकी जन्म शताब्दी का। उस समय जारी किए गए स्मारक नोट पर गांधी जी बैठे हुए नजर आते हैं और पीछे सेवाग्राम आश्रम की झलक दिखती है। हालांकि यह नोट सीमित उद्देश्य के लिए था और इस नोट को नियमित करेंसी नहीं माना गया। 1987 में जब 500 रुपये का नोट फिर से जारी किया गया, तब उस पर गांधी की तस्वीर लगाई गई, लेकिन असली बदलाव 1996 में आया, जब आरबीआई ने महात्मा गांधी सीरीज शुरू की। इसके बाद से भारत में जारी होने वाले सभी नोटों पर गांधी जी का चेहरा अनिवार्य रूप से छपने लगा। इस फैसले के पीछे तर्क साफ था कि महात्मा गांधी न केवल आजादी की लड़ाई के सबसे बड़े प्रतीक थे, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और सत्य के प्रतिनिधि माने जाते थे! आशीष/ईएमएस 11 फरवरी 2026