राष्ट्रीय
11-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। केरल राज्य का कोझिकोड शहर यूनेस्को द्वारा भारत के पहले ‘साहित्य के शहर’ के रूप में चयनित किया गया है। इस उपलब्धि ने न सिर्फ कोझिकोड को नई पहचान दी है, बल्कि पूरे देश की साहित्यिक साख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाई है। यह सम्मान दुनिया में केवल कुछ ही शहरों को मिलता है, जहां साहित्यिक योगदान, पुस्तक संस्कृति और पुस्तकालयों का मजबूत नेटवर्क समाज की पहचान का हिस्सा हो। यूनेस्को के ‘क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क’ में शामिल होने के साथ ही कोझिकोड अब एडिनबर्ग, प्राग, डब्लिन जैसे वैश्विक साहित्यिक नगरों की श्रेणी में आ गया है। यह सम्मान किसी एक दिन या साल के काम का परिणाम नहीं, बल्कि उस परंपरा का फल है जिसमें शहर की धड़कनें किताबों की खुशबू से जुड़ी हैं। कोझिकोड में मौजूद 500 से ज्यादा पुस्तकालय इस बात का सबूत हैं कि यहां की जनता केवल पढ़ने तक सीमित नहीं, बल्कि किताबों को अपने सामाजिक जीवन का हिस्सा मानती है। शहर के वार्षिक साहित्य उत्सवों में देश-विदेश के लेखक और विचारक भाग लेते हैं, जो इसे एक जीवंत साहित्यिक केंद्र बनाते हैं। एक समय कालीकट के नाम से प्रसिद्ध कोझिकोड अपने मसालों और व्यापार के लिए ऐतिहासिक रूप से जाना जाता रहा है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान इससे कहीं आगे बढ़कर है। शहर की गलियों, चाय के खोखों और सार्वजनिक स्थलों पर साहित्य पर होने वाली चर्चाएं आज भी एक सामान्य और स्वाभाविक दृश्य हैं। यूनेस्को ने इसी ‘रीडिंग कल्चर’ को पहचानते हुए इसे भारत का पहला ‘सिटी ऑफ लिटरेचर’ घोषित किया है। शहर के पुस्तकालय न केवल ज्ञान का स्रोत हैं, बल्कि सामुदायिक जुड़ाव के केंद्र भी बन चुके हैं। कोझिकोड कई महान साहित्यकारों की जन्मभूमि भी रहा है। एस.के. पोट्टेक्कट्ट और एम.टी. वासुदेवन नायर जैसी हस्तियों ने मलयाली साहित्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। शहर की प्रसिद्ध ‘मिट्ठई थेरुवु’ पर स्थित पोट्टेक्कट्ट की प्रतिमा आज भी स्थानीय लोगों और यात्रियों को इस शहर की गहरी साहित्यिक जड़ों की याद दिलाती है। यहां आयोजित होने वाला ‘केरल लिटरेचर फेस्टिवल’ पूरे एशिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में गिना जाता है। साथ ही, कोझिकोड मलयाली प्रकाशन उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जहां डिजिटल दौर के बावजूद भौतिक किताबों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। सुदामा/ईएमएस 11 फरवरी 2026