राष्ट्रीय
11-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। कैंसर के मामलों में वृद्धि के मामले में दिल्ली देश के अन्य महानगरों से तेजी से आगे निकल रही है। खासतौर पर पुरुषों में कैंसर की दर अब सभी मेट्रो शहरों में सबसे अधिक पाई गई है। एक अध्ययन ने दिल्ली को लेकर यह बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की है। अध्ययन में 2015 से 2019 के बीच देशभर में कैंसर के मामलों और उससे होने वाली मौतों का आकलन किया गया। इसके लिए 43 कैंसर रजिस्ट्रियों के आंकड़े लिए गए, जो भारत की लगभग 18 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस अवधि में करीब 7.8 लाख नए कैंसर मरीज सामने आए, जबकि 2.6 लाख लोगों की मौत इस बीमारी से हुई। अध्ययन में यह भी सामने आया कि भारत में हर दस में से एक व्यक्ति को जीवनकाल में कभी न कभी कैंसर होने का खतरा है। मिजोरम जैसे राज्यों में यह जोखिम पुरुषों के लिए 21 प्रतिशत से भी अधिक पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में कैंसर की स्थिति सबसे अधिक गंभीर है। यहां प्रति एक लाख पुरुषों पर लगभग 147 कैंसर मरीज दर्ज किए गए, जो अन्य महानगरों की तुलना में कहीं ज्यादा है। दिल्ली सीके बिड़ला हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल बेहतर रिकॉर्डिंग का परिणाम नहीं है, बल्कि वास्तव में कैंसर के मामलों में तेजी आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। राजधानी की जहरीली हवा, खासकर पीएम2.5 जैसे कण, फेफड़ों के कैंसर का बड़ा कारण बन रहे हैं। तंबाकू और धूम्रपान मुंह और फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा अनियमित जीवनशैली, मोटापा, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी भी जोखिम को बढ़ा रही है। पर्यावरणीय प्रदूषण और भारी धातुओं के संपर्क में रहना भी एक बड़ा कारक माना जा रहा है। दिल्ली के पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर, मुंह का कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर सबसे आम पाए जा रहे हैं। वहीं चिंताजनक बात यह है कि कैंसर अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में कैंसर अक्सर देर से पकड़ा जाता है, जिससे उपचार और कठिन हो जाता है। कम उम्र से प्रदूषण, अनियमित खान-पान और फास्ट फूड की आदतें कैंसर के जोखिम को और बढ़ा रही हैं। सुदामा/ईएमएस 11 फरवरी 2026