क्षेत्रीय
11-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। हाई कोर्ट ने 36 साल पुराने दहेज प्रताड़ना के मामले में पति और ननद को दोषी ठहराया। कोर्ट ने मृतका के आखिरी पत्र को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि दहेज की मांग और उत्पीड़न से तंग आकर उसने आत्महत्या की। दिल्ली हाईकोर्ट ने 36 साल पुराने दहेज मौत मामले में फैसला सुनाते हुए पति और ननद को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया। अदालत ने कहा कि मरते समय इंसान जो आखिरी बात कहता है समें सच होता है और इसलिए मृतका की आखिरी चिट्ठी पर भरोसा किया जाना चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि दहेज की मांग और तानों से नई-नवेली दुल्हन की जिंदगी नरक बन जाती है। अक्सर लड़की के माता-पिता रिश्ते बचाने के लिए चुप रहते हैं और समाज में बदनामी के डर से मामला घर की चार दीवारों के अंदर ही दबा रहता है। जब हालात बेकाबू हो जाते हैं। तभी परिवार शिकायत करने की सोचता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पड़ोसी सब कुछ नहीं जान पाते क्योंकि ज्यादातर उत्पीड़न घर के अंदर होता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की जांच पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों को ठीक से नहीं परखा और मरने से पहले लिखी गई चिट्ठी को गंभीरता से नहीं देखा। मृतका की सहेली और पिता ने उसकी लिखावट की पहचान की और यह साफ हुआ कि आखिरी नोट उसी ने लिखा था। किसी और ने नहीं। कोर्ट ने पाया कि शादी के बाद से ही उसे कम दहेज लाने के लिए ताने दिए जाते थे और लगातार मानसिक दबाव डाला जाता था। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/11/फरवरी/2026