11-Feb-2026
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- जल संरक्षण, मिट्टी कटाव रोकने और वन्यजीवों के लिए बेहतर आवास विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में कच्छ के छोटे रण क्षेत्र में वन विभाग द्वारा एक नवाचारपूर्ण पहल शुरू की गई है। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने जानकारी देते हुए बताया कि शुष्क जलवायु के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में वर्षा जल का संग्रह कर मिट्टी के कटाव को रोकने और वन्यजीवों तथा पक्षियों के लिए आवास की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। मंत्री मोढवाडिया ने बताया कि कच्छ के छोटे रण में वन्यजीव संरक्षण, संवर्धन और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए मृदा-नमी संरक्षण से संबंधित विशेष कार्य किए जा रहे हैं। इसके तहत लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में तीन विशेष प्रकार के पाल (बांध) तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी संख्या भविष्य में बढ़ाई जाएगी। इस परियोजना के परिणामस्वरूप मानसून के दौरान बहकर जाने वाले लगभग 1.35 करोड़ लीटर वर्षा जल का संग्रह किया जा सकेगा। इससे सर्दियों तक वन्यजीवों को प्राकृतिक रूप से पेयजल उपलब्ध रहेगा। अगले दो से तीन वर्षों में यह जल पूरी तरह पेय योग्य हो जाएगा, जो रण के शुष्क वातावरण में जीव-जंतुओं के लिए ‘अमृत’ समान सिद्ध होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह परियोजना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि कच्छ के रण में एक संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करने का प्रयास है। मिट्टी में नमी बढ़ने से भूमि की उर्वरता में सुधार होगा और स्थानीय घास की प्रजातियां प्राकृतिक रूप से विकसित होंगी। इससे चारे की उपलब्धता बढ़ेगी, तृणभक्षी वन्यजीवों को पर्याप्त भोजन मिलेगा और उनकी संख्या में वृद्धि होगी। यह योजना तालाबों और जलाशयों को वन्यजीवों, स्थानीय पक्षियों और देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श आवास में परिवर्तित करेगी। साथ ही तालाब के बीच बनाए गए ‘माउंट’ (टेकरी) पक्षियों और जानवरों के लिए सुरक्षित एवं आरामदायक विश्राम स्थल का कार्य करेंगे। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए जा रहे ये पाल मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ रण क्षेत्र में नमी बनाए रखने में सहायक होंगे। शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से मुकाबला करने में यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। दीर्घकाल में यह जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगी। इस पहल से कच्छ का छोटा रण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म के एक समृद्ध और आकर्षक केंद्र के रूप में भी उभरकर सामने आएगा। सतीश/11 फरवरी