राष्ट्रीय
11-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ की पहल पर प्रकाशित हैंडबुक आन कमबाइट जेडर स्टीरियोटाइप को अब खारिज किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि यह हैंडबुक अत्यधिक तकनीकी और हार्वर्ड-केंद्रित है, इसमें आम लोग या यौन उत्पीड़न की पीड़ित महिलाओं को मदद नहीं मिलती। दरअसल इस हैंडबुक का उद्देश्य जजों और वकीलों को महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ प्रचलित रूढ़ियों और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल के प्रति संवेदनशील बनाना था। इसमें सुझाव दिए गए थे कि कैसे अदालत में स्टीरियोटाइप सोच के बजाय सही शब्दों का प्रयोग करे। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारी की पीठ ने कहा कि इसमें फारेंसिक दृष्टिकोण से कई पहलुओं की व्याख्या की गई है, जिन्हें जनता या पीड़िता समझ नहीं सकती। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को भेजकर पुनर्विचार करने, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की समिति के माध्यम से सुधार करने का निर्देश दिया। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका और एमिकस क्यूरी शोभा गुप्ता की सहायता ली जाएगी। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में बैठे हाईकोर्ट के जजों को सीधे हैंडबुक से निर्देश देने का कोई लाभ नहीं। इसके बजाय उन्हें अकादमी में ट्रेनिंग के माध्यम से संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 मार्च, 2025 के फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें यौन उत्पीड़न के प्रयास और अपराध की तैयारी में अंतर किया गया था। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और निचली अदालत को निर्देश दिया कि आरोपियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाए। आशीष दुबे / 11 फरवरी 2026