लंदन (ईएमएस)। लगातार या बिना डॉक्टर की सलाह के पेन किलर दवाओं को सेवन करना बेहद खतरनाक हो सकता है। दर्द की दवाओं का अत्यधिक उपयोग शरीर के अहम अंगों, खासतौर पर किडनी और लिवर, पर अतिरिक्त दबाव डालता है। धीरे-धीरे यह दबाव क्रॉनिक डैमेज तक पहुंच सकता है और कुछ मामलों में अंग फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। हैल्थ एक्सपटर्स की माने तो किडनी पर इन दवाओं का असर विशेष रूप से गंभीर माना जाता है। एनएसएआईडीएस शरीर में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन्स को रोकती हैं, जो किडनी की रक्त नलिकाओं को खुला रखने में मदद करते हैं। इनके कम होने पर किडनी में ब्लड फ्लो घट जाता है, जिससे फिल्ट्रेशन क्षमता कम होती जाती है। लंबे समय तक सेवन के परिणामस्वरूप एक्यूट किडनी इंजरी, एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी या क्रॉनिक किडनी डिजीज विकसित हो सकती है। पैरासिटामोल सामान्य रूप से सुरक्षित है, लेकिन ओवरडोज या लगातार सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। बुजुर्गों, डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट डिजीज के मरीजों में इसका जोखिम ज्यादा होता है। लिवर भी दर्द की दवाओं के दुष्प्रभाव से अछूता नहीं है। लिवर का मुख्य काम दवाओं को मेटाबॉलाइज करना है। पैरासिटामोल की अधिक मात्रा लेने पर लिवर में मौजूद ग्लूटाथियोन कम हो जाता है, जिससे लिवर सेल्स को सीधा नुकसान होता है। इसके कारण एक्यूट लिवर फेलियर, लिवर एंजाइम्स बढ़ना, सूजन और ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एनएसएआईडीएस का प्रभाव लिवर पर कम होता है, लेकिन लम्बे समय तक उपयोग जोखिम बढ़ा देता है। हेपेटाइटिस मरीज, सिरोसिस पीड़ित और शराब का अधिक सेवन करने वाले लोग ज्यादा खतरे में रहते हैं। किडनी और लिवर में नुकसान के शुरुआती लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं। किडनी समस्या के संकेतों में थकान, पैरों में सूजन, झागदार पेशाब, पेशाब कम होना और बीपी बढ़ना शामिल हैं। वहीं लिवर डैमेज के लक्षणों में भूख कम लगना, उल्टी, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, पीलिया, गहरा पेशाब और वजन घटना प्रमुख हैं। कई बार मरीज दर्द महसूस नहीं करते और समस्या केएफटी/एलएफटी टेस्ट में सामने आती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेन किलर बिना डॉक्टर की अनुमति के लंबे समय तक न लें और पैरासिटामोल की सुरक्षित मात्रा से अधिक सेवन न करें। दर्द से राहत के लिए योग, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज और हॉट/कोल्ड पैक जैसे विकल्प बेहतर और सुरक्षित माने जाते हैं। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जीवनरक्षक साबित हो सकता है। एनएसएआईडीएस को 10–14 दिनों से अधिक लगातार लेने से बचना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न होने दें और किडनी या लिवर संबंधी रोग होने पर डॉक्टर को जरूर बताएं। समय-समय पर जांच करवाना भी जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 12 फरवरी 2026