राष्ट्रीय
13-Feb-2026
...


-अखिलेश पर तीखा हमला तो योगी से मुलाकात ने खोले कयासों के द्वार नई दिल्ली,(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती को दिल्ली में टाइप-8 श्रेणी का नया सरकारी बंगला आवंटित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आम तौर पर राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को टाइप-6 या टाइप-7 श्रेणी का आवास मिलता है, ऐसे में उच्च श्रेणी का बंगला मिलने को राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस घटनाक्रम की शुरुआत अप्रैल 2024 से मानी जा रही है, जब लोकसभा चुनाव के दौरान मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने सीतापुर की रैली में भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला किया था। उन्होंने पार्टी को नफरत फैलाने वाली और आतंकवादियों की पार्टी तक कह दिया था। इस बयान से नाराज होकर मायावती ने उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया और इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सार्वजनिक रूप से दी। दिलचस्प बात यह रही कि आकाश आनंद समाजवादी पार्टी पर भी हमलावर थे, लेकिन इस पर मायावती ने सार्वजनिक नाराजगी नहीं जताई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे यह संदेश गया कि मौजूदा समय में मायावती भाजपा से सीधे टक्कर लेने से बचना चाहती हैं। हालांकि, रैलियों में वे राजनीतिक आलोचना करती रहीं। सीएम योगी का आभार जताया इसके बाद 9 अक्टूबर 2025 को एक रैली में मायावती ने भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सार्वजनिक रूप से आभार जताया। इस बयान ने अटकलों को और हवा दी। जनवरी 2026 में उन्हें दिल्ली में नया टाइप-8 बंगला आवंटित होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भाजपा और बसपा के बीच कोई रणनीतिक समीकरण बन रहा है। यूपी चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारे में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। अखिलेश को सबसे बड़ा दुश्मन बताया मायावती ने हाल के बयानों में अखिलेश यादव को अपना “सबसे बड़ा राजनीतिक दुश्मन” बताया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बसपा की मुख्य राजनीतिक लड़ाई समाजवादी पार्टी से है। हालांकि, भाजपा और बसपा के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंदरखाने संभावित समझदारी या चुनावी रणनीति को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बदलते समीकरणों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब देखना होगा कि यह नजदीकियां महज राजनीतिक रणनीति हैं या आने वाले चुनाव में किसी बड़े गठबंधन की भूमिका तैयार कर रही हैं। हिदायत/ईएमएस 13फरवरी26