सीजेआई के सामने वकील ने किया दावा, सुप्रीम कोर्ट में मामले को गंभीर माना नई दिल्ली,(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण के फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग के मामले लेकर एक मामला सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने आरोप लगाया कि कुछ लोग फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल कर लोगों के नाम मतदाता सूची से कट रहे हैं। फॉर्म 7 का प्रयोग आमतौर पर मतदाता सूची में नाम दर्ज करने या नाम में बदलाव के लिए होता है, लेकिन वकील ने दावा किया कि इस नियम का गलत इस्तेमाल करके कई लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने मामले की गंभीरता को देखकर सुनवाई का भरोसा देकर कहा कि यह मुद्दा संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वकील ने विशेष रूप से बताया कि यूपी में कई नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हटाए गए हैं, जिससे उनकी मतदान की अधिकारिता प्रभावित हो सकती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को अगले कुछ हफ्तों में आयोजित किया जाएगा और यह देखा जाएगा कि फॉर्म 7 का प्रयोग कैसे और किन परिस्थितियों में किया गया। बता दें कि देशभर के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया चालू है। उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल्स एक्ट (आरपीए), 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने के लिए फ़ॉर्म 6, वोट कटवाने के लिए फ़ॉर्म 7 और नाम-पता सही कराने के लिए फॉर्म 8 का प्रयोग किया जा रहा है। क्या है फॉर्म-7? चुनाव आयोग के अनुसार फॉर्म 7, मृत्यु, स्थान परिवर्तन के कारण मतदाता सूची में अपना या किसी अन्य व्यक्ति का नाम हटाने का आवेदन फार्म है। चुनाव आयोग के मुताबिक, गलत जानकारी देने पर एक साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में कहा, फॉर्म 7 के जरिए योजनाबद्ध तरीके से पीडीए और मुसलमानों के वोट कटे जा रहे हैं। आशीष दुबे / 13 फरवरी 2026