14-Feb-2026
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मध्यप्रदेश का दूसरा नंबर नई दिल्ली,(ईएमएस)। गड्ढों में गिरकर लोग दम तोड़ते रहे और देश भर में सरकारें तमाशबीन बनकर सब देखती रहीं। बीते 5 साल के आंकड़े देखकर कुछ ऐसा लगता है। पांच सालों में देश के 9 हजार 438 लोगों की जान गडढ़ों में गिरने से चली गई। इन 5 सालों में लापरवाही के मामले उत्तर प्रदेश (यूपी) टॉप पर है। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि उत्तर प्रदेश में गड्ढों के कारण मरने वालों की संख्या पूरे देश के कुल आंकड़े में आधे से अधिक है। यूपी में इन 5 सालों के अंदर 5 हजार 127 लोगों की मौत हुई है। सरकारी आंकड़े में हैरान करने वाला फैक्ट भी सामने आया है, जिसके मुताबिक बिहार, गोवा, चंडीगढ़ और आंध्र प्रदेश में इन 5 सालों में गड्ढे से गिरने के कारण एक भी शख्स की जान नहीं गई है। मृतकों की संख्या में 53 फीसदी उछाल सड़क परिवहन और राजमार्ग मन्त्रालय की ओर से लोकसभा में बताया गया है कि 2020 की तुलना में साल 2024 में गड्ढों में गिरकर मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। साल 2020 में जहां 1,555 लोगों की मौत गड्ढों में गिरकर हुई थी। वहीं साल 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,385 हो गई। आंकड़ों के हिसाब से इस तरह के मामलों में 53 फीसदी का उछाल रिकॉर्ड किया गया। इस सूची में यूपी शीर्ष पर है और दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का नाम है। मध्यप्रदेश के अंदर इन 5 सालों में 969 लोगों की मौत हुई। इसके बाद 612 नंबरों के साथ तमिलनाडु तीसरे नंबर। वहीं 425 के साथ ओडिशा चौथे नंबर पर रहा। पंजाब में गड्ढों में गिरकर 414 तो असम में 395 लोगों की मौत हुई। देश की राजधानी दिल्ली में गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बनी। लेकिन आपकों जानकार हैरानी होगी कि पिछले 5 सालों में दिल्ली के अंदर इस तरह से मौत के 50 मामले ही दर्ज हुए हैं। आंकड़ों के हिसाब से उत्तर पूर्वी राज्यों ने सूची में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। मणिपुर, नगालैंड और त्रिपुरा में गड्ढों में गिरकर हुई मौत का एक भी केस दर्ज नहीं किया गया है। आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी गड्ढों में गिरकर एक भी मौत का केस नहीं आया है। हालांकि, एक भी मौत न होने के मामले में बिहार का नाम चौंकाने वाला है, जहां बेहद लंबा रोड नेटवर्क है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उसके मुताबिक साल 2027 की तुलना में गड्ढों में गिरकर हुई मौतों के मामले में कमी आई है। तब एक साल के अंदर 3,597 लोगों की मौत हुई थी। आशीष/ईएमएस 14 फरवरी 2026