मुंबई (ईएमएस)। अपने चार दशक लंबे करियर में अभिनेता, निर्माता-निर्देशक और लेखक अनुपम खेर ने अभिनय के साथ लेखन की दुनिया में भी मजबूत जगह बनाई है। अनुपम खैर अपनी चौथी किताब ‘डिफ्रेंट बट नो लेस’ को बुकस्टोर की शेल्फ पर सजा देखकर वह भावुक हो उठे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस खास पल को साझा करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। अनुपम खेर ने पोस्ट में लिखा कि बुकस्टोर में अपनी किताबें एक साथ देखकर उन्हें शांत, संतुष्ट और बेहद कृतज्ञ महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता होने के नाते उन्हें हमेशा लगा था कि उनकी कहानियां स्क्रीन और मंच के जरिए जिंदा रहेंगी, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन लेखक भी बनेंगे। खेर ने स्वीकार किया कि ‘लेखक’ शब्द उनके लिए आज भी नया और खास महसूस होता है। खास बात यह है कि अनुपम खेर हिंदी मीडियम बैकग्राउंड से आते हैं, इसके बावजूद उन्होंने अपनी सभी चार किताबें अंग्रेजी में लिखी हैं। उन्होंने गर्व से लिखा कि बुकस्टोर की शेल्फ पर उनकी किताबों की मौजूदगी यह साबित करती है कि भाषा कभी भी किसी सपने के बीच दीवार नहीं बनती। हर कॉपी उन्हें यह याद दिलाती है कि सपने बदल सकते हैं और नए आविष्कार की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने कहा, “उस शेल्फ पर रखी हर कॉपी सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि यह एक संदेश है कि भाषा कोई लिमिट नहीं है। यह मुझे न सिर्फ जरूरी महसूस कराता है, बल्कि बहुत शुक्रगुजार भी बनाता है।” अनुपम खेर की सभी किताबें लाइफ-कोचिंग और सेल्फ-हेल्प श्रेणी से जुड़ी हैं, जिनका उद्देश्य पाठकों को जीवन में सकारात्मक बदलाव, आत्मविश्वास और चुनौतियों का सामना करने की दिशा में प्रेरित करना है। एक अभिनेता से लेखक बनने का उनका सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह भी साझा किया कि अंग्रेजी में किताब लिखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन इस सफर ने उन्हें नया दृष्टिकोण और उत्साह दिया है। बता दें कि अनुपम खैर अब तक ‘लेशन्स लाइफ टाउट मी’ और ‘योर बेस्ट डे इज टूडे’ सहित चार किताबें लिख चुके हैं। सुदामा/ईएमएस 15 फरवरी 2026