इस्लामाबाद (ईएमएस)। पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के मुद्दे पर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर घेरने की कोशिश करने में जुटा है। इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसकी कानूनी टीम ने 2-3 फरवरी को पॅरमानेन्ट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन, हेग में हुई सुनवाई में हिस्सा लिया, लेकिन भारत ने कार्यवाही में भाग नहीं लिया। पाकिस्तान ने चिनाब नदी पर प्रस्तावित स्वालकोट मेगा डैम प्रोजेक्ट को लेकर भी आपत्ति जताकर इस रोकने की मांग की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि आर्बिट्रेशन कोर्ट ने भारत से उसके ‘रन ऑफ द रिवर’ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के डिजाइन और संचालन से जुड़े बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। कोर्ट ने भारत को शामिल होने के लिए बुलाया, लेकिन नई दिल्ली ने ट्रिब्यूनल की वैधता को ही स्वीकार करने से इंकार किया। भारत का कहना है कि वह इस मध्यस्थता प्रक्रिया को गैर-कानूनी मानता है, इसलिए संवेदनशील ऑपरेशनल डेटा साझा नहीं करेगा। पाकिस्तान ने दावा किया कि आईडब्ल्यूटी आज भी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है और कोई भी पक्ष इस समझौते को एकतरफा निलंबित या रद्द नहीं कर सकता। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विश्व बैंक से हस्तक्षेप की अपील की है। गौरतलब है कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई यह संधि सिंधु प्रणाली की नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। पाकिस्तान ने इसके पहले कश्मीर में किशनगंगा और रातले हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं को लेकर भी आपत्ति जाहिर की थी। उसका कहना है कि इन परियोजनाओं से संधि के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। भारत का रुख है कि उसकी सभी परियोजनाएं संधि के दायरे में और वैध हैं। बीते वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल था। इस निर्णय से पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। उसने चेतावनी दी है कि यदि भारत एकतरफा कदम उठाता है, तब इस गंभीर परिणामों वाला कदम मानेगा। इस पूरे विवाद ने दोनों देशों के बीच जल कूटनीति को फिर से तनावपूर्ण बना दिया है। आशीष/ईएमएस 15 फरवरी 2026