ज़रा हटके
16-Feb-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखने वालों के लिए मौजूदा साल, 2026 खास होने जा रहा है। इस साल दो अहम खगोलीय घटनाएं होने वाली है। पहली घटना में इसी महीने 17 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण (एन्युलर सोलर एक्लिप्स) होगा। इसके बाद 12 अगस्त को टोटल सोलर एक्लिप्स (पूर्ण सूर्य ग्रहण) होगा। इन दोनों घटनाओं का दुनियाभर के लोगों को इंतजार है। सवाल है कि क्या भारत में इन खास नजारों को देखा जा सकेगा। एन्युलर सोलर एक्लिप्स तब होता है, जब सूरज, चांद और पृथ्वी एक सीध में आते हैं, जबकि चांद पृथ्वी से सबसे दूर होता है, जिसे एपोजी कहते हैं। चांद छोटा दिखता है इसलिए यह सूरज को पूरी तरह से ढक नहीं पाता। इससे एक चमकदार बाहरी रिंग दिखता है। इस रिंग ऑफ फायर कहते हैं। यह टोटल सोलर एक्लिप्स से अलग है, जिसमें चांद सूरज की रोशनी को पूरी तरह से रोक लेता है। 17 फरवरी को होने वाला एन्युलर ग्रहण शाम 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होकर शाम 5 बजकर 42 मिनट पर अपने पीक पर पहुंचेगा। इसकी एन्युलरिटी का रास्ता सिर्फ अंटार्कटिका के ऊपर से गुजरेगा। इसकी वजह से भारत में दिखाई नहीं देगा। अफ्रीका, साउथ अमेरिका के कुछ हिस्सों, अटलांटिक और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में इस देखा जा सकेगा। 17 फरवरी को होने वाले ग्रहण का रिंग ऑफ फायर फेज पीक विजिबिलिटी पर 1 मिनट और 52 सेकंड तक रहेगा। ग्रहण के रास्ते में सिर्फ कुछ अंटार्कटिक रिसर्च स्टेशन हैं, जहां साइंटिस्ट इस घटना को सीधे देख सकते हैं। पार्शियल ग्रहण में ऐसा लगेगा जैसे मुख्य रास्ते से बाहर के इलाकों में चांद सूरज को काट रहा है। भारतीयों को यह ग्रहण सीधे देखने का मौका नहीं मिलेगा। हालांकि एस्ट्रोनॉमी के शौकीन इन दुर्लभ सोलर घटनाओं को डिजिटल स्ट्रीम पर देख सकते हैं। नासा और वर्चुअल स्पेस टेलीस्कोप जैसी स्पेस एजेंसियां इस इवेंट का यूटूयब और ऑफिशियल वेबसाइट पर ब्रॉडकास्ट करेंगी। इसके बाद 12 अगस्त में टोटल सोलर एक्लिप्स होगा। 12 अगस्त को होने वाला टोटल सोलर एक्लिप्स भी भारत से नहीं दिखेगा। आशीष/ईएमएस 16 फरवरी 2026