ज़रा हटके
16-Feb-2026
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सैन फ्रांसिस्को (ईएमएस)। मशहूर अमेरिकी उदयोगपति एलन मस्क का मंगल ग्रह पर बसने का सपना मानव सभ्यता के भविष्य को सुरक्षित करने की बड़ी योजना का भाग माना जाता है। लेकिन मंगल ग्रह की सबसे बडी चुनौती वहां का वातावरण है। एलन मस्क का पहला लक्ष्य इंसानों को मंगल पर पहुंचाना है, लेकिन वह अच्छी तरह जानते हैं कि लाल ग्रह की कठोर परिस्थितियाँ इंसान के लिए तुरंत अनुकूल नहीं हैं। यही कारण है कि मस्क चाहते हैं कि इंसानों से पहले रोबोट मंगल पर जाएं और इंसानों के लिए वहां सुरक्षित माहौल तैयार करें। मंगल ग्रह की सबसे बड़ी चुनौती उसका वातावरण है। वहां सांस लेने लायक हवा नहीं है और तापमान इतने नीचे चले जाते हैं कि माइनस 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसके अलावा खतरनाक कॉस्मिक रेडिएशन लगातार ग्रह की सतह को प्रभावित करता रहता है। ऐसे माहौल में इंसान ज्यादा देर तक बिना सुरक्षा जीवित नहीं रह सकता। दूसरी ओर रोबोट न तो ऑक्सीजन, पानी या भोजन पर निर्भर होते हैं और न ही रेडिएशन जैसी परिस्थितियों से तुरंत प्रभावित होते हैं। इसलिए मस्क के अनुसार वे मंगल मिशन की पहली ज़रूरत हैं। टेस्ला के ह्यूमनॉइड रोबोट ऑप्टिमस जैसे उन्नत मशीनों से उम्मीद है कि वे मंगल पर प्राथमिक ढांचा तैयार करेंगे। इनमें रहने योग्य शेल्टर, सोलर ऊर्जा संयंत्र, कम्युनिकेशन नेटवर्क और ऑक्सीजन उत्पादन यूनिट शामिल हैं। इसका मतलब है कि जब इंसान वहां पहुंचेंगे, उन्हें पूरी तरह बंजर या असुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा। मंगल पर संसाधनों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि रोबोट ग्रह की जमीन के भीतर जमी बर्फ की तलाश करेंगे, जिसे पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन में बदला जा सकता है। यह न सिर्फ वहां रहने वाले मानवों के लिए ज़रूरी होगा, बल्कि भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है। इसके अलावा, मंगल पर सुरक्षित लैंडिंग करना भी बेहद जोखिम भरा है। वहां का पतला वातावरण और अनियमित सतह अक्सर मिशनों को खतरे में डाल देती है। रोबोट पहले जाकर स्टारशिप की लैंडिंग और कार्गो संचालन की वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करने में मदद करेंगे, जिससे आगे होने वाली असफलताओं की संभावनाएं कम होंगी। एलन मस्क का मानना है कि 2050 तक मंगल पर 10 लाख लोगों का एक शहर बस सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि कम ग्रेविटी, अधिक रेडिएशन और मानव स्वास्थ्य पर इसके दीर्घकालीन प्रभाव अभी भी बड़े सवाल हैं। सुदामा/ईएमएस 16 फरवरी 2026