ज़रा हटके
16-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। यदि सुबह उठते ही आपकी जीभ पर सफेद या पीली परत जमी दिखाई देती है, तो यह शरीर में बढ़ते हुए ‘आम’ का संकेत है। जीभ शरीर का वह अंग है जो न सिर्फ स्वाद का अहसास कराता है बल्कि अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना भी होता है। डॉक्टर अक्सर जीभ देखकर ही कई बीमारियों का अंदाजा लगा लेते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ‘आम’ अत्यंत हानिकारक होता है और तब बनता है जब शरीर में जमा विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते। इससे मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है, खाना सही से पच नहीं पाता और पेट में सड़न जैसी स्थिति बनने लगती है। इसके कारण कब्ज, गैस, एसिडिटी और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यही गंदगी खून तक पहुंचकर आगे चलकर गठिया, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकती है। जीभ पर परत जमना इसी ‘आम’ की बढ़ोतरी का संकेत है, जिसे आयुर्वेदिक तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है। पहला उपाय है इंटरमिटेंट फास्टिंग। आयुर्वेद मानता है कि रोजाना 14–16 घंटे का अंतराल शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय देता है। शाम को 6–7 बजे के बीच भोजन कर लेना और अगला भोजन अगले दिन 10–11 बजे लेना सबसे उपयुक्त माना जाता है। उपवास के दौरान यदि भूख लगे तो तरल पेय ले सकते हैं, जिससे शरीर को सफाई का अधिक समय मिलता है। दूसरा उपाय है जीरा, धनिया और सौंफ का काढ़ा। इन तीनों को बराबर मात्रा में पानी में उबालकर बनाया गया यह काढ़ा दिनभर घूंट-घूंट पीने से शरीर के अंदर जमा ब्लॉकेज खत्म होते हैं और टॉक्सिन बाहर निकलने में सहायता मिलती है। तीसरा उपाय है अग्निसार क्रिया, जिसे योग में सबसे प्रभावी क्रियाओं में से एक माना जाता है। इसे खाली पेट किया जाता है, जिसमें पेट को अंदर-बाहर पंप किया जाता है। इससे पाचन अग्नि मजबूत होती है और शरीर में जमा ‘आम’ धीरे-धीरे दूर होता है। आयुर्वेद यह भी सलाह देता है कि पूरे दिन हल्का गुनगुना पानी पीएं। ठंडा पानी टॉक्सिन को जमा करने में मदद करता है और कब्ज की समस्या बढ़ा सकता है। सुदामा/ईएमएस 16 फरवरी 2026