ज़रा हटके
16-Feb-2026
...


वाशिंगटन (ईएमएस)। आजकल बच्चे पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं तो युवा करियर की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। वयस्क अपनी पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ के बीच संतुलन बनाने को लेकर टेंशन में रहते हैं। ऐसे में अधिकांश लोग मानते हैं कि टेंशन अब उनकी जिंदगी का हिस्सा है और वे इसके साथ जीना सीख चुके हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यही तनाव धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है और शरीर तथा दिमाग दोनों को प्रभावित करता है। शुरुआत में मामूली लगने वाला स्ट्रेस जब लगातार बढ़ता है, तो यह मानसिक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर डाल सकता है। एक हालिया मीडिया रिपोर्ट बताती है कि लंबे समय तक तनाव में रहने से मेंटल हेल्थ सबसे पहले प्रभावित होती है। ज्यादा तनाव एंजायटी, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याओं को जन्म देता है। कई लोगों में नकारात्मक विचार बढ़ने लगते हैं और ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाता है। अगर इन संकेतों को समय रहते पहचानकर संभाला न जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। जिन लोगों को पहले से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है, उनके लिए तनाव और भी खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि यह उन्हें आत्मघाती प्रवृत्तियों की ओर भी धकेल सकता है। तनाव का प्रभाव केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा नुकसान हार्ट पर भी होता है। तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेज हो जाता है। लंबे समय तक यही स्थिति रहने पर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। कई शोधों में पाया गया है कि मानसिक तनाव और दिल की बीमारियों के बीच गहरा संबंध है। पाचन तंत्र भी तनाव का बड़ा शिकार बनता है। ज्यादा स्ट्रेस लेने से गैस, एसिडिटी, कब्ज, डायरिया और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याएं होने लगती हैं, क्योंकि तनाव पाचन एंजाइम्स के संतुलन को बिगाड़ देता है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है, जिससे व्यक्ति जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगता है और इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और हार्मोनल असंतुलन भी तनाव के आम परिणाम हैं। महिलाओं में पीरियड्स संबंधी दिक्कतें और पुरुषों में हार्मोनल बदलाव इसके कारण बढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित योग, ध्यान, प्राणायाम, पर्याप्त नींद, पौष्टिक आहार और समय पर आराम मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। सुदामा/ईएमएस 16 फरवरी 2026